आयोजन

कन्या किस्मत वालो के यहीं जन्म लेती हैं,पूज्य अर्चना दीदी

        राजेश बनासिया
भाऊँखेड़ी,एमपी मीडिया पॉइंट

श्रीमद्भागवत भागवत कथा के सभी प्रसंग आज इस कलयुग के जमाने मे शिक्षाप्रद हैं भागवत कथा कलयुग में भवसागर से पार होने का अति उत्तम साधन हैं यह बात भाऊँखेड़ी के प्राचीन शिवमंदिर प्रांगण में चल रही भागवत कथा के पॉचवे दिन पूज्या अर्चना दीदी ने कही उन्होंने आगे बताया की इस कलयुग के जमाने मे जब किसी के यहाँ बच्ची का जन्म होता है तो पूरा परिवार खुशी का बजाय दुःख मनाने लगता हैं जबकि कन्या का जन्म किस्मत वालो के यहां होता हैं और कन्या के जन्म पर दुख नही मनाते हुवे खुशियां मनाना चाहिए क्योंकि लड़की दो कुलो के नाम को रोशन करती हैं व अब लड़को से लड़कियां किसी भि क्षेत्र में कम नही हैं।वहीं भागवत कथा में आगे उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा में कृष्ण सुदामा चरित्र का प्रसंग आता हैं जिसमे भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का वर्णन करते हुवे बताया की मित्रता में कभी आर्थिक रूप से कभी छोटा बड़ा देखा नही जाता मित्रता में सच्चा मित्र वही है जो संकट की घड़ी में मित्र की मदद के लिये तत्पर रहे मित्रता में मित्र से कभी छल कपट नही करना चाहिए क्योंकि सुदामा ने छल पूर्वक भगवान कृष्ण से कपट किया व आड़े में चने खा लिए थे तो सुदामा को कई दिनों तक दरिद्र बनकर भटकना पड़ा भगवान कृष्णा द्वारिकापुरी के राजा होने के बाद अपने मित्र को कभी नही भूले ओर उन्होंने मित्रता निभाई अपने समान राज्य देकर सुदामापुरी का निर्माण किया।

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