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कथा सुनने से होता है मानव जीवन में संस्कारों का उदय, पंडित शैलेश तिवारी

इछावर,एमपी मीडिया पॉइंट

भक्तों के पापों का हरण कर लेने वाला ही ईश्वर है। श्रीमद् भागवत कथा सुनने का लाभ तभी है जब हम इसे अपने जीवन में उतारें और उसी के अनुरूप व्यवहार करें। यह बात श्री हनुमान मंदिर धर्मशाला पुराना बस स्टैंड इछावर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन कथा वाचक पंडित शैलेश तिवारी ने श्रोताओं को कथा का रसपान कराते हुए प्रकट किया
कथावाचक ने कहा कि कथा सुनने से मानव जीवन में संस्कार का उदय होता है। जीवन में कितनी भी विकट परिस्थिति क्यों न आ जाए मुनष्य को अपना धर्म व संस्कार नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसे ही मनुष्य जीवन के रहस्य को समझ सकते हैं। कहा कि जिसकी भगवान के चरणों में प्रगाढ़ प्रीति है, वही जीवन धन्य है। ईश्वर ने विभिन्न लीलाओं के माध्यम से जो आदर्श प्रस्तुत किया, उसे हर व्यक्ति को ग्रहण करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन मूल्यों के बारे में जानकारी मिलने के साथ-साथ अपने कर्तव्य को भी समझा जा सकता है। कथावाचक ने बताया की ज्ञान का स्वरूप राम को बताया, वैराग्य का स्वरूप लक्ष्मण, और सीता को भक्ति का स्वरूप बताया। सुंदर कांड पर प्रवचन देते हुए उन्होंने बताया कि सुंदर कांड में हनुमान का चरित्र है। वहीं इस अवसर पर जयंत गाथा प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि वन भ्रमण काल में एक बार प्रभु श्रीराम बहुत ही रमणीक स्थान पर पहुंचे, जहां का आकर्षक प्राकृतिक सौंदर्य, झरने की मधुर धुन के बीच मां श्रृंगार कर रही है और भगवान श्रीराम समक्ष बैठे हैं। यह दृश्य जयंत ने छुपकर देख लिया।

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