लेख

कहीं यौन शोषण मामले के मुख्य आरोपी प्यारे मियां को बचा तो नहीं रहे गृहमंत्री – मुख्य गवाह नाबालिग लड़की की मौत और पुलिस की कार्यवाही संदेह के घेरे में….

विजया पाठक, 

भोपाल के बहुचर्चित प्यारे मियां यौन शोषण मामले में गुरुवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला। इस मामले में प्यारे मियां की बर्बरता की शिकार हुई 17 वर्षीय नाबालिग लड़की की अधिक नींद की गोलियां खा लेने से मौत हो गई। उसके बाद पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने आया। पुलिस ने परिवार की भावनाओं को दरकिनार करते हुए खुद ही अंतिम संस्कार के लिए विश्राम घाट तक ले नाबालिग के शव को ले गई और इस पूरी प्रक्रिया में बहुत जल्दबाजी दिखाई। पुलिस प्रशासन की कार्यशैली भी संदेह के घेरे में आ गई है। खास बात यह है कि प्रदेश की राजधानी में इतनी बड़ी घटना हो जाने पर भी प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का कान में जूं तक नहीं रेंगती औऱ उन्होंने पुलिस को रोकना जरूरी भी नहीं समझा। कुल मिलाकर इस पूरी घटना में पुलिस की आमनवीयता उत्तर प्रदेश में हुए हाथरस कांड जैसी दिखाई पड़ती है। साथ ही गृहमंत्री मिश्रा की इस तरह की कार्यशैली कहीं न कहीं संदेह के घेरे में आती दिखाई पड़ती है। कहीं ऐसा तो नहीं कि गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा खुद ही यौन शोषण के मुख्य आरोपी प्यारे मियां को बचा रहे हो? अगर ऐसा कुछ है तो यह प्रदेश के लिए बहुत दुःखद होगा। नाबालिग लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बनाने वाले इस दुराचारी व्यक्ति को फांसी के फंदे पर लटकाने के बजाय पुलिस प्रशासन उसे जेल में रख उसकी खातिरदारी कर रहा है। कहीं ऐसा तो नहीं कि गृहमंत्री के इशारे पर इस पूरे मामले से जुड़े गवाहों को एक-एक कर समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी हो। एक बड़ा सवाल यह भी उठता है कि जब यह नाबालिग लड़की सरकारी बालिका आश्रय गृह में थी तो उसे इतनी संख्या में नींद की गोलियां कहां से मिली। क्यों नहीं आश्रय गृह के चिकित्सको के सामने पीडिताओं को गोली-दवाई दी जाती। कुछ इस तरह के तमाम बड़े सवाल है संदेह के घेरे में आते है जिनकी विस्तार से जांच कराई जानी चाहिए ताकि इस पूरे मसले में लापरवाही करने वाले लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके। इतना ही नहीं एक बड़ा सवाल यह उठता है कि जब प्रदेश की राजधानी के किशोर आश्रय गृह में रहने वाली लड़कियां सुरक्षित नहीं है तो फिर अन्य जिलों के आश्रय गृहों में क्या हाल होगा इस बात को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को गंभीरता से लेना चाहिए और जल्द से जल्द प्यारे मियां मामले में जान गवाने वाली इस नाबालिग लड़की के मौत का कारण पता लगाए जाने संबंधी जांच के निर्देश देने चाहिए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Close