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सीहोर: ट्रामा सेंटर है या रेफर सेंटर ? बंद हो इलाज का ड्राम..

सीएमएचओ डॉ डेहरिया पर तानाशाही बरतने का कांग्रेसियों ने लगाया आरोप, नारेबाजी करते सौंपा ज्ञापन

प्रदर्शन

कांग्रेस ने एक घंटे तक ट्रामा सेंटर पर धरना देकर सीएस को सौंपा ज्ञापन,
करोड़ों रुपए के ट्रामा सेंटर को बना दिया रेफर सेंटर,

मरीजों को नहीं मिल रहा उचित इलाज

सीहोर,  एमपी मीडिया पाइंट

ट्रामा सेंटर को बने लंबा समय बीत चुका है, लेकिन इसमें अभी तक स्टाफ के साथ पर्याप्त उपकरण नहीं होने से गंभीर घायलों को भोपाल रेफर किया जा रहा है। औसतन हर दो गंभीर मरीजों को भोपाल रेफर किया जाता है। ट्रामा में स्टाफ और सुविधाएं बढ़ाने के लिए सीएम और कलेक्टर अन्य से गुहार लगा चुके है, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा है। आलम यह है कि गंभीर मरीजों को इलाज के लिए ट्रामा सेंटर से रेफर किया जा रहा है। वर्षों से जमा यहां पर चिकित्सकों के हवाले अस्पताल की जिम्मेदारी है। जिन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं को चौपट कर दिया है। उक्त आरोप कांग्रेस ने लगाते हुए रविवार को सिविल सर्जन आनंद शर्मा को ज्ञापन देकर 30 अक्टूबर तक अव्यवस्थाओं में सुधार करने की चेतावनी दी है।
रविवार को दोपहर एक बजे जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष नईम नवाब के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेसजनों ने जिला मुख्यालय स्थित ट्रामा सेंटर पर जारी अव्यवस्थाओं में तत्काल सुधार की मांग की है, कांग्रेसजनों का कहना है कि सीएमएचओ डॉ. सुधीर डेहरिया की तानाशाही और लापरवाही के कारण पूरे जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था मजाक बन गई है। वहीं जिला अस्पताल इन दिनों खुद बीमार चल रहा है। हालत यह है कि साधारण सीजनल बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को ड्यूटी टाइम में देखने के लिए डॉटर उपलध नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में मरीज और उनके परिजनों की खासी फजीहत हो रही है। कोरोना कोविड 19 महामारी के चलते जिला अस्पताल एकदम बदला बदला सा नजर आया। कोरोना के घातक परिणामों को देखते हुए आमजन मानस की मानसिकता में भी बदलाव आया, लेकिन अब समय के साथ जब लोगों ने कोरोना के साथ जीना सीख लिया तो जिला अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
डॉक्टर अपनी दुकानदारी में लगे, अस्पताल भगवान भरोसे

कांग्रेसजनों का आरोप है कि कोरोना संकट के इस दौर में धरती पर भगवान के रूप में माने जाने वाले डॉक्टरों ने गरीब मरीजों अपनी कमाई का जरिया बना लिया है, करोड़ों रुपए के इस अस्पताल में सुविधा कुछ भी नहीं है, दवाईयों का टोटा होने के कारण मरीजों को बाहर से दवाई लेने पड़ रही है, इसके अलावा सीएम कहते है मुफ्त सिटी स्केन कराई जाना चाहिए, लेकिन अस्पताल में इसका चार्ज लिया जा रहा है, इसके अलावा सोनोग्राफी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है, डॉक्टरों की कमी दूर की जाए।

प्रशासनिक अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान
प्रदेश की भाजपा सरकार के जनप्रतिनिधि सत्ता के खेल में जुट हुए है, वहीं प्रशासनिक अधिकारी कभी भी अस्पताल के चक्कर नहीं लगाते जिससे यहां पर पदस्थ डॉक्टर गैर जिम्मेदार हो गए है और अपनी दुकानदारी चलाने में लगे हुए। इस मौके पर  ज्ञापन देने वालों सभी वरिष्ठ कांग्रेसजन मौजूद थे।

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