आस्था

सीहोर: धूमधाम से निकाली माता रानी की “चुनरी-यात्रा”

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आज की जाएगी मरी माता पर रात्रि 12 बजे काल निशा आरती,
आस्था और सादगी से निकाली मंदिर परिसर में चुनरी यात्रा

सीहोर, एमपी मीडिया पाइंट

शुक्रवार को शहर के विश्रामघाट मां चौसट योगिनी मरी माता मंदिर में नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की विशेष पूजा अर्चना के बाद मंदिर में प्रतीकात्मक रूप से कोरोना संक्रमण काल को देखते हुए यहां पर मौजूद श्रद्धालुओं ने आस्था और सादगी के साथ मंदिर परिसर में चुनरी यात्रा निकाली।

इस मौके पर युवा समाजसेवी अतुल जैन (चाय-घर वाले), व्यवस्थापक गोविंद सिंह मेवाड़ा, रोहित मेवाड़ा, ज्योतिषाचार्य पंडित गणेश शर्मा, मनोज दीक्षित मामा, हीरु बेलानी, पंडित उमेश शर्मा, पंकज झंवर, हृदेश राठौर, राजकुमार भारती, नरेन्द्र डाबी, यजमान सुनील चौकसे, अजय मिश्रा, मितलेश शर्मा, प्रहलाद परमार, अखिलेश माहेश्वरी, आशीष माहेश्वरी, रामू सोनी, कृष्णकांत, सुभाष कुशवाहा, चिन्टू मेवाड़ा, परवेश, सोनू और मोनू आदि शामिल थे।

वहीं शनिवार को रात्रि 12 बजे काल निशा आरती का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर व्यवस्थापक श्री मेवाड़ा ने सभी श्रद्धालुओं से शासन की गाइड लाइन का पालन करने की अपील की है। मंदिर में हर रोज सुबह दिव्य हवन का आयोजन किया जा रहा है। इसके बाद यहां पर आरती की जाती है।
अराधना से आकस्मिक संकटों से मुक्ति मिलती
पंडित गणेश शर्मा ने बताया कि नवरात्रि का सातवे दिन मां कालरात्रि को समर्पित होता है। मान्यता है कि मां कालरात्रि भक्तों को अभय वरदान देने के साथ ग्रह बाधाएं भी दूर करती हैं। मां कालरात्रि की अराधना से आकस्मिक संकटों से मुक्ति मिलती है। मां कालरात्रि का शरीर अंधकार की तरह काला है। मां के बाल लंबे और बिखरे हुए हैं। माता के गले में पड़ी माला बिजली की तरह चमकती है। मां कालरात्रि के चार हाथ हैं। एक हाथ में माता ने खड्ग (तलवार) दूसरे में लौह शस्त्र, तीसरे हाथ वरमुद्रा और चौथे हाथ अभय मुद्रा में है और मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को काल से बचाती हैं। मतलब जो भक्त मां के इस स्वरूप की अराधना करते हैं उनकी अकाल मृत्यु नहीं होती है।
आज सुबह की जाएगी महागौरी की पूजा और रात्रि को 12 बजे काल निशा आरती
जिला संस्कार मंच के मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि शहर के विश्रामघाट मां चौसट योगिनी मरी माता मंदिर में नवरात्रि के आठवें दिन सुबह महागौरी माता की पूजा अर्चना और हवन किया जाएगा, रात्रि को 12 बजे काल निशा आरती की जाएगी। हर साल मंदिर के विशाल परिसर में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा आरती की जाती थी, लेकिन इस साल कोरोना संक्रमण काल के कारण सादगी से आरती की जाएगी और शासन की गाइड लाइन का पालन करते हुए व्यवस्थापक गोविंद सिंह मेवाड़ा, रोहित मेवाड़ा, ज्योतिषाचार्य पंडित गणेश शर्मा, हीरु बेलानी, पंडित उमेश शर्मा आदि मौजूद रहेंगे।
व्यवस्थापक ने की अपील
व्यवस्थापक गोविंद सिंह मेवाड़ा ने कहा कि मंदिर समिति द्वारा किसी भी प्रकार का चंदा आदि नहीं लिया जा रहा है, उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की है कि जो भी श्रद्धालु एक रुपए का भी दान करना चाहता हो वह स्वयं मंदिर में उपस्थित होकर श्रद्धानुसार भेंट कर सकता है।

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