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इछावर: अस्पताल तो सिविल मगर सुविधाएं शिथिल

समस्या का सच

अस्पताल तो सिविल मगर सुविधाएं शिथिल ।

सोनू वर्मा, इछावर

प्रदेश के प्रसिद्ध सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सन 2021 में सिविल अस्पताल का दर्जा तो मिला लेकिन 1 वर्ष के बाद भी सरकार द्वारा सुविधाएं मुहैया नहीं करवाई गई,लिहाजा यह अस्पताल आज भी जस की तस अवस्था में है।

सीहोर जिले का सबसे पुराना इछावर अस्पताल आज खुद अपनी बीमारियों से जूझ रहा है इस अस्पताल का रोग इतना है कि कभी 8 डॉक्टर इसमें पदस्थ हुआ करते थे लेकिन वर्तमान में यह अस्पताल तीन डॉक्टरों पर आश्रित है और सबसे बड़ी बात यह है कि , जिस समय 8 डॉक्टर हुआ करते थे उस समय ओपीडी की संख्या 75 के आसपास हुआ करती थी वर्तमान समय में ओ.पी.डी की संख्या में बढ़ोतरी के साथ 350 के आसपास पहुंच चुकी है और डॉक्टर एवं पैरामेडिकल स्टाफ की संख्या निरंतर घटती जा रही है।
अगर जिक्र किया जाए तो यह अस्पताल केंद्र सरकार की कायाकल्प योजना के अंतर्गत 5 बार प्रदेश स्तरीय पुरस्कार प्राप्त कर चुका है लेकिन इतना खूबसूरत अस्पताल के अंदरूनी हाल शासन की अनदेखी के कारण बेहाल हैं।
सिविल अस्पताल में स्टाफ अभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के हिसाब से है जिसमें 3 डॉक्टर एवं पांच महिला नर्स सम्मिलित हैं जबकि सिविल अस्पताल दर्जा प्राप्त है।
नियमानुसार अस्पताल में 13 डॉक्टर एवं 17 नर्स स्टाफ होना चाहिए
वर्तमान में 30 बेड की व्यवस्था है जबकि सिविल अस्पताल के लिहाज से 100 बेड की व्यवस्था होनी चाहिए थी
अस्पताल में 60 प्रकार की पैथोलॉजी जांच व्यवस्था तो है जिनमें ईसीजी,एक्स-रे,थायराइड, लीवर, किडनी आदि की जांचे आती हैं किंतु सिटी स्कैन एवं सोनोग्राफी जैसी मुख्य जांचों एवं पैरामेडिकल स्टाफ का अभाव है सिविल सर्जन रहित सिविल अस्पताल में आंख,कान,नाक,गला एवं हड्डी रोग विशषज्ञों के अभाव में सुविधाओं से वंचित है।

इछावर ब्लाक के नागरिक वंचित हैं सुविधाओं से

बीएमओ डॉक्टर बीबी शर्मा बताते हैं कि हमने उच्चाधिकारियों को कई बार अस्पताल की समस्याओं से अवगत कराया है यहां तक कि स्वास्थ्य विभाग के मंत्रालय में भी कई बार पत्र प्रेषित किए लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया हम अपने स्तर पर निरंतर स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं।
जहां कोरोना काल में इस अस्पताल ने अपना सर्वस्व देते हुए 96% रिकवरी प्राप्त की एवं 70 से 80% संक्रमित मरीज को सकुशल घर पहुंचाया किंतु वही आज भी एंबुलेंस सुविधा से वंचित यह अस्पताल 108 इमरजेंसी वाहन पर निर्भर होकर निरंतर अपनी सेवाएं दे रहा है।

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