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इछावर: विधायक के कोई पुत्र, या सगे भाई-भतीजे कभी विधायक नहीं रहे.. -राजेश शर्मा

सियासत का सच

इछावर: विधायक के कोई पुत्र, या सगे भाई-भतीजे कभी विधायक नहीं रहे..

राजेश शर्मा

बात लगातार चल रही है “वंशवाद और प्रतिनिधि” पर लेकिन छन कर जो बात आ रही वह यही कि, काबिज रहने के लिए विश्वसनीय विकल्प जरुरी है। अन्य किसी पर भरोसा करना अपने राजनीतिक केरियर पर कुल्हाड़ी मारना होता है। अगर भूल से विकल्प (अदर्स) दिखाई भी दे तो, उसे पूरी तरह से मारना जरुरी होता है। इछावर के प्रथम विधायक स्व. बाबू केशरीमल जैन यह गलती कर चुके थे जिसका खामियाजा सबको मालूम है। उड़ान भरते गुब्बारे को झेलना और उसे और उसके जनक को निशाना बनाने का हुनर तो कोई राजनितिकबाजों से सीखे।
क्षणिक रुप की यह संतुष्टि कभी-कभी इतिहास के काले पन्नों में समा जाती है। वर्तमान विधायक करण सिंह वर्मा ने “रांग टेकलिंग का फाउल” नहीं किया। पूरे पॉलटिकल केरियर में कभी अपने ‘विकल्प’ को उभरने नहीं दिया।

समर्पण और त्याग सूली टंग गए। अपने अपनों के चक्कर में दायित्व दफा हो गए। सरकारी योजनाएं घर-आंगन की नुमाईश। बंदर बांट शुरु हो गई। मुंह देख तिलक करना शोभा।
इस प्रपंच में भूल भी गए कि “ये जो पब्लिक है ना, बाबू यह सब जानती है”

तो फिर लोटते हैं “वंशवाद” पर जिसमें जिक्र होता है इछावर विधानसभा के ग्राम हालियाखेड़ी का, जहां पटेल परिवार नें अनेक जनप्रतिनिधि इछावर को दिए जिनमें पूर्व विधायक शैलेन्द्र पटेल भी शामिल हैं। तहसील मुख्यालय से महज़ आठ किलोमीटर दूर ग्राम हाल्याखेड़ी और उससे सटे गांव कांग्रेस का गढ़ माने जाते हैं। इतिहास और रिकॉर्ड बताते हैं कि पटेल फैमिली का प्रभाव कुछ इस कदर रहा कि हर हालत में वहां से कोई भी कांग्रेस को मात नहीं दे पाया।

इछावर की राजनीति में हालियाखेड़ी पटेल परिवार का उल्लेखनीय योगदान रहा है। हालियाखेड़ी क्षेत्र स्वर्गीय पटेल जगन्नाथ सिंह के नाम से जाना जाता रहा है। स्व. पटेल इछावर मार्केटिंग सोसायटी के अध्यक्ष सन् 70 के दशक में रहे वह देश के पूर्व राष्ट्रपति स्व. डॉ शंकर दयाल शर्मा के नजदीक लोगों में से एक थे। वह पूर्व मंत्री, उत्तराखण्ड के पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी के विश्वासपात्र थे, चाहे चुनाव ग्राम के प्रधान का हो या कांग्रेस के स्व. हरिचरण वर्मा का हो या स्व. ईश्वर सिंह चौहान का, पटेल जगन्नाथ सिंह की भूमिका पूरे चुनाव में कम नहीं रही। भूतपूर्व विधायक स्व. केशरीमल जैन के बहुत ही निकटतम रहे।
यहां यह बताना भी उचित होगा कि वह भी क्या अविस्मरणीय दिन थे नगरवासियों के लिए जब पटेल की बैठक इछावर के पान चौराहे पर प्रतिदिन देखने को मिलती थी। हरदिल अजीज पटेल परिवार की दूसरी पीढ़ी में बड़े बेटे लीलाधर पटेल ग्राम के सरपंच, बड़ी बहू जिला पंचायत सीहोर के सदस्य निर्वाचित हुईं। अभी हाल ही में संपन्न हुए पंचायत चुनाव में उनके पोते बृजेश पटेल मामूलीे अंतर से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव हार गए पटेल साहब के बाद इस विरासत में शैलेंद्र पटेल के सन् 2013 के विधानसभा चुनाव में भी हाल्याखेड़ी पटेल परिवार की भूमिका रही इस बात को नकारा नहीं जा सकता।
आज के राजनीतिक परिदृश्य में स्वर्गीय पटेल जगन्नाथ सिंह जी के पोते बृजेश पटेल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और जयवर्धन सिंह के खास लोगों में से एक समूचे सीहोर जिले में जाने जाते हैं।

अब जिक्र आता है स्व. बुलाखी चंद्र राठौर का, जिन्होंने तत्कालीन जनसंघ को इछावर में अपने पसीने से सींचा। वह खुद नगरपालिका में पार्षद रहे। जनसंघ के प्रति उनकी तपस्या भंग नहीं हुई और उन्होंने सन् 1979 में अपने ज्यैष्ठ पुत्र स्व. देवनाराण राठौर को जनपद प्रतिनिधि का खिताब दिलवाया। राठौर परिवार की राजनीतिक यात्रा थमी नहीं और उनके कनिष्ठ पुत्र अवध नारायण राठौर सन् 1994 में इछावर नगर पंचायत में वार्ड-8 से 101 मतों से जीतकर पार्षद बने। परिवार की समाजसेवा का प्रतिफल सन् 2022 में भी मिला जब बुलाखी चंद्र राठौर की पुत्रवधू सावित्री महेश राठौर और अवध राठौर की पुत्रवधू ज्योति नीलेश राठौर भारी बहुमत से पार्षद निर्वाचित घोषित की गईं। नया रिकॉर्ड भी कायम हुआ जब एक ही परिवार से दो महिला पार्षद इछावर नगर परिषद में काबिज़ हैं।

कहने का मतलब यह कि चाहे पार्टी कांग्रेस ही क्यूँ न हो उसमें भी “वंशवाद” ग्राम पंचायत से लेकर विधानसभा तक अपने पैर पसारे रहा और यही स्थिति कामबेश भाजपा में भी देखने को मिली लेकिन किसी भी विधायक का भाई,भतीजा या बेटा विधायक नहीं बन पाया।
हालांकि इछावर की फिजा़ में परकटे परिंदो ने थोडी़-बहुत उड़ान तो अवश्य ही भरी।

क्रमशः  प्रत्येक रविवार

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