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भूत प्रेतों द्वारा संचालित एक अनोखा होटल, पलपल बदलती रहस्यमयी परिस्थितियां- जयंत शाह

प्लीज़ गो टू वाक...

भूत प्रेतों द्वारा संचालित एक अनोखा होटल,

पलपल बदलती रहस्यमयी परिस्थितियां,

प्लीज़ गो टू वाक…

 

जयंत शाह

एशिया महाद्वीप में एक ऐसा देश है जो पूरी दुनिया के लिए प्राचीन काल से ही आश्चर्य एवं रहस्यों का पिटारा रहा है |
चीनी यात्री फाह्यान से लेकर वास्को डी गामा तक इस देश के आश्चर्यचकित कर देने वाले रहस्यमई जादू देखने के लिए बेताब रहते थे। तभी दिन-रात इस देश की खोज में लगे रहते थे।
अंग्रेज लोग तो यह देखकर दांतो तले उंगली दबा लेते थे कि, कैसे एक सपेरा बीन बजाता है और रस्सी ऊपर की ओर जाने लगती है तथा उसी रस्सी पर एक नन्ही बालिका भी लटक जाती है लेकिन रस्सी हिलती भी नहीं है।

उनकी खोज कभी पूरी नहीं हो पाई और ना ही कभी पूरी हो पाएगी जितना खोजेंगे रोज नए रहस्य मिलेंगे।
और तो और इस देश मे अरब सागर से लगा हुआ एक छोटा सा मनमोहक राज्य है जो अपने पर्यटन व्यवसाय के लिए प्रसिद्ध है। ‘बीचों’ की यह बस्ती विश्व प्रसिद्ध है।
उसी में इतने रहस्य समाए हुए हैं कि उस को समझाते हुए ही आदमी की आधी से अधिक उम्र निकल जाए।

यहां जिक्र करना जरुरी होगा कि पूरा देश जब अंग्रेजों के कब्जे से स्वतंत्र हो गया तब भी यह राज्य पुर्तगाल के कब्जे में था। – सेना ने ‘ऑपरेशन विजय अभियान’ शुरू कर इस राज्य के साथ दमन और दीव को पुर्तगालियों के शासन से मुक्त कराया था। सरकार के आदेश के बाद  सेना ने यहां ऑपरेशन शुरू किया था।
देश की स्वतंत्रता के लगभग 14 वर्षों बाद यह राज्य अपने अनोखे रहस्य को समेटे हुए देश में शामिल हुआ।

इसी छोटे से राज्य में एक रहस्यमई रेस्टोरेंट है जिसे भूत-प्रेतों द्वारा संचालित किया जाता है इस रेस्टोरेंट में शामिल है एक “बार” ।
मित्रों यह वह वाला “बार” नहीं। जो हम बार-बार सुन रहे हैं कि अबकी “बार” फलां फलां ..की सरकार।
बल्कि यह वह “बार” है।
जिसके मालिक की मृत्यु साल भर पहले ही हो चुकी है जिसका मृत्यु प्रमाण पत्र कुछ लोगों द्वारा “बार”-“बार” बोलते हुए टीवी कैमरा के सामने लहराया जा रहा है ।
लेकिन वह मृत व्यक्ति प्रेत योनि से ही रेस्टोरेंट्स और “बार” का सफलतापूर्वक संचालन कर रहा है।
तथा उस रेस्टोरेंट का लाइसेंस भी उस राज्य की सरकार द्वारा उसे दिया गया है।यह अलग बात है कि उसके जीएसटी लाइसेंस का पता एक जिंदा आदमी के घर के नाम पर है।
रेस्टोरेंट में भोजन भी प्रेतों की पसंद का मिलता है जैसे बेल की जीभ और सूअर का मांस इत्यादि।
और आश्चर्य तथा रहस्य की बात यह है कि भूत प्रेतों की पसंद का भोजन जिंदा लोग बड़े चाव से इस रेस्टोरेंट में आकर सेवन करते हैं।
रहस्य और आश्चर्य की बात तो यह भी है कि इस प्रेत योनि से संचालित मालिक के द्वारा रेस्टोरेंट्स का प्रचार करने और अपना बताने रोज नए मालिक और मालकिन प्रकट हो जाते हैं।और अपना मालिकाना हक जताते हैं।

आश्चर्य और रहस्य की हद तो तब हो गई जब एक विशेष संस्कृति के झंडा बरदार परिवार जो देश की राजधानी में रहता है उसी परिवार से जुड़ी हुई युवती इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के प्रसिद्ध एंकर को उस रेस्टोरेंट में बुलाती है और कैमरे के सामने बताती है कि यह मेरा रेस्टोरेंट है। इसमें लजीज सूअर का मांस मिलता है और कैमरे के सामने ही स्वयं भी उसका लुफ्त उठाते हुए उस एंकर को भी बड़ी शिद्दत से परोसती है।
लेकिन बाद में उस रेस्टोरेंट्स के असली मालिक “भूत प्रेत” उसी युवती को सपने में आकर जाने क्या फटकार लगाता है ? कि उस युवती के साथ देश की राजधानी में रहने वाला पूरा परिवार उस रेस्टोरेंट के मालिकाना हक से मुकर जाता है। एवं समाचार माध्यमों पर पहुंच कर इस बात का ऐलान करता है कि उस जादुई रहस्यमई रेस्टोरेंट एवं “बार” से हमारे परिवार का कोई वास्ता नहीं है ।
यहां तक की न्यायालय में भी अर्जी लगा दी जाती है कि हमारे परिवार का नाम इस जादुई “बार” से ना जोड़ा जाए। “रहस्यमयी पर्दा” पूरे मंजर से कब गिरेगा इसका समूचे मुल्क को इंतज़ार है।

और अंत में कि_ यह आश्चर्यजनक किंतु सत्य है।

( उक्त व्यंग लेख का वर्तमान की किसी घटना से कोई संबंध नहीं है )
“प्लीज़ गो टू वाक”
जयंत शाह

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