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…तभी नेताजी ‘अध्यक्ष’ होते हैं -राजेश शर्मा

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…तभी नेताजी ‘अध्यक्ष’ होते हैं

राजेश शर्मा

खरीफ फसल की बुवाई से किसान तकरीबन फा़रिक हो गए हैं, जो बचे हैं वह भी जल्द हो जाएंगे.. अब 25 जून को त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव की “नस” पर ठप्पा लगाने के बाद उन्हें 06 जुलाई और 13 जुलाई जैसी मानसूनी तारीख़ को भी बारीकी से समझना होगा। व्यवसायिक होती जा रही राजनीति की रीढ़ पर “मोहर” से जोरदार प्रहार करना ही होगा।

अब बात मौसम की, ..हर काम और बात का एक मौसम होता है। लेकिन बरसात का मौसम कई बातों का होता है।
जैसे मोर यदि मोरनी को रिझाने लगता है तो मेढक और झींगुर भी अपने ‘बेसुरे’ या “ससुरे” राग आलापने लगते हैं। कोई अनदेखी, उपेक्षा का शिकार “यक्ष” कागज-कलम-दवात नहीं मिले तो मेघ से ही अपनी विरह व्यथा कहलवाने लगता है। कोई रसवर्षा से रस मलाई की तरह सराबोर हो जाता है तो कोई रस के सपने ही देखता रहता है और सपनों की कहानी कहता रहता है।
वैसे सपने देखने का कोई सीज़न नहीं होता।
सपनों पर व्यक्ति का एकाधिकार होता है लेकिन सियासतियों को आने वाले ख्वाब जगजाहिर भी होते हैं।
पंचायत,नगरपरिषद,नगरपालिका से लेकर नगर निगम तक सियासतियों के ख्वाब “जासूसी उपन्यास” की तरह बिक रहे और “तारक मेहता का उल्टा चश्मा” की तरह दिख रहे हैं। जिधर निगाह डालो वहीं बागों में भले ही खिज़ात , मगर बागियों में बहार नज़र आ रही है… बागियों की पिक्चर निर्दलियों के नाम से “बाक्स आफिस” पर धूम मचाए हुए है। धूम-2 यदि “पोलिंग बूथ” पर सपने सच कर गई तो…भाजपा और कांग्रेस दोनों की बिछी खटिया “सपने” तोड़कर खड़ी हो जाएगी।

अध्यक्ष पद के लिए “मंडी” भाव चेत जाएंगे__जिसकी आंच में कई अरमान झुलस जाएंगे और अनायास ही किसी के झुलसे बदन और तबाह हुए ख्वाब पर “रोकड़े” का लेप लग जाएगा।

स्थानीय स्तर पर होने वाले चुनाव “माइनस मार्किंग” के आधार पर सम्पन्न होते हैं। “रांग टेकलिंग” का फाउल चुनाव हराऊ साबित हो सकता है। लोकतंत्र के बाधक तत्व दिन-प्रतिदिन उभरते नज़र आ रहे हैं। जिनके वस्त्र की सभी जेबें पैसा,प्रतिष्ठा,जाति,चापलूसी,लोभ,दगा,दारु से भरी होंगी वही “विजेता” कहलाएंगे। राजनीति होगी कभी सेवा के लिए या जन उत्थान के लिए, अब तो मेवा है और व्यापार है । और यदि व्यापार है तो उसमें अशर्फियां नहीं पार्षद तुलते हैं। तभी नेताजी ‘अध्यक्ष’ होते हैं। और कई हौंशिया “भैये” खुद का वार्ड बदलकर अन्य वार्ड से दूसरे के हक पर डाका डालने की कुचेष्टा तक कर डालते हैं।

उधर भाजपा एवं कांग्रेस ने अपने-अपने प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर दी है। बात इछावर नगरपरिषद की हो, तो अभी वार्ड-1से कांग्रेस प्रत्याशी का नाम सूची से गायब है। समीकरण बदल गए हैं मंगलवार को सूची जारी की गई, जबकि कल 22 जून फार्म वापस लेने की अंतिम तारीख़ है। दोनों प्रमुख दल ज्यादातर त्रिकोणीय संघर्ष में फंसे नज़र आ रहे हैं। चाहे सीहोर , आष्टा या इछावर ही क्यूँ न हो।

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