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मुगलकालीन कुप्रथाएं,अंधविश्वास रुढ़िवादिता के घेरे में अब भी कई लोग

मन्नतें...!

सीहोर,एमपी मीडिया पॉइंट

मुगल,अंग्रेज और फ्रांसिस सरकारें भारत के कई हिस्सों में राज करके चले गईं।मुगलों द्वारा अपने शासनकाल में मंदिरों पर गेती-फावड़े चलाए गए अन्य समाजों में अपने हिसाब से कुप्रथाएं फैलायी गईं। जो कुछ नगरों में आज भी कायम हैं।

उनमें से एक इछावर क्षेत्र आज भी उदाहरण बना हुआ है। यहां हिंदू धर्म के एक समाज द्वारा मन्नतें मांगने के लिए किसी भी रविवार को विशेष आयोजन किया जाता है जिसमें अन्य समाज के फकीर द्वारा कलमा, अजान पढ़ते हुए पूजा कराई जाती है और फिर दूसरे दिन लोभान चढ़ाया जाता है।

बताया जाता है कि पूर्वकाल के दौरान जो महिला सर्वश्रेष्ठ नृत्य किया करती थी उसका विवाह अन्यत्र कराया दिया जाता था।लेकिन बदलाव के चलते अब सिर्फ़ नर-मादा के प्रतीक दो डंडियां जमीन में गाड़ी जाती हैं। उसी पर लोभान चढ़ाया जाता है।

इस संबध में कार्यक्रम में विशेष रुप से उपस्थित “फकीर” ने बताया कि यह पीर बाबा का आयोजन है ,और इस प्रकार के आयोजन से मनोकामना पूर्ण होने का विधान बताया गया है।उधर जानकारी अनुसार इस प्रकार के आयोजन को कुप्रथा मानते हुए संबंधित समाज के कई लोगों ने इस कथित आयोजन से अपना नाता भी तोड़ लिया है।उनका कहना है कि यदुवंशी श्रीकृष्ण जी और परमपिता परमेश्वर ही हमारे कर्ता-धर्ता हैं। अन्य किसी समाज की किसी भी कुप्रथा , रुढ़िवादिता पर विश्वास नहीं।

लोगों ने बताया कि ,हालांकि समाज में फैली कुप्रथाओं, रुढ़िवादिता, अंधविश्वास को लेकर सरकार खुद जागरूकता अभियान चलाए हुए है लेकिन यह अभियान कई स्थान पर आज भी हवा में गोते लगा रहा है।खासबात यह कि स्वास्थ्य और धर्म से जुड़े ज्यादातर मामले अब भी अनदेखी का शिकार बने हुए हैं।

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