साहित्य का सोपान

समीक्षा …. कोई एक मौसम जी लूँ

कोई एक मौसम जी लूँ….. वैसे तो यह शीर्षक है मीना सूद जी के काव्य संग्रह का…. लेकिन उस लाइन पर कुछ देर रुक कर गौर कीजिए…. इसमें से पुकार लगाती वह आरजू सुनाई देगी…. जो ज़िन्दगी के तमाम मौसम को एक एक कर के जी भर के जीना चाहती है….. और उस लम्हे को जीने के दौरान … कायनात के सभी करिश्मों को भूल जाने को जी चाहता है …..। शीर्षक में एक छिपा हुआ सा अनुरोध भी है…. जो कोई एक मौसम को जी लेने का आत्मीय आमंत्रण देता हुआ भी महसूस होता है…। जिसको इंकार करना….. भावों की रसधार से ओत प्रोत दिल के वश की बात नहीं है…।
संग्रह की प्रस्तावना कहें या फिर नाम दे दें भूमिका का…. इसको लेखिका ने अंतर्मन के नाम से दिल के उद्गार को शब्दों में बांधा है…. वह भी पूरे काव्यात्मक तरीके से… पढ़ो तो लगता है किसी काव्य धारा में बहे चले जा रहे हैं….। उस काव्य धारा में किसी पहाड़ी नदी की शुभ्र धारा जैसा अल्हड़पन मौजूद है… कल कल का मधुर संगीत है… अपनी एक मस्ती है… बेकरारी है किसी सागर में समा जाने की….।
बात करते हैं संग्रह के समर्पण की… जो कवियत्री मीना सूद जी ने… अपने जीवन साथी अजय जी को किया है…. आपको लगेगा इसमें क्या खास बात है… समर्पण तो हर पुस्तक का किसी न किसी आत्मीयजन को रचनाकार करता ही है…. इस समर्पण की विशेषता यह है कि…. संग्रह की प्रारंभिक रचनाएँ … उन्होंने अपने जीवन साथी को केंद्रीय पात्र के रूप में समर्पित भी की हैं…। जो उनके एक दूसरे के प्रति समर्पित दाम्पत्य जीवन के दस्तावेज की तरह लगती हैं…। यकीन अभी भी नहीं आ रहा होगा … देखिए पहली ही रचना मुखातिब की यह चार पंक्तियां……

तुम जो मुख़ातिब हो
तो आँख भर देख लें तुम्हें
तुम जो दूर जाओ तो
जी भर सोच लें तुम्हें…..

है न….. ओ साथी रे…. तेरे बिना भी क्या जीना…. वाला समर्पित अंदाज…..।

आइए अब चर्चा संग्रह की रचनाओं की…. जो साहित्य की काव्य विधा की किसी परम्परागत व्याकरण की वर्जनाओं में बंधी नजर नहीं आती है… बस ख्याल ने दस्तक दी…. और उस दस्तक को शब्दों में ढाल दिया…… पढ़ने में सीधे सरल और… दिल से लिखे गए… दिल द्वारा पढ़े जाने वाले भावों के रस से सने हुए… लेकिन शब्दों के चुनाव में बरती गई विशेष सावधानी भी नजर आती है… जो शब्द हृदय को स्पंदित करने का सामर्थ्य रखते हों… उन … दिल धड़काने वाले शब्दों का चयन बहुत ही संयम के साथ किया गया है….।

शैलेश तिवारी , सम्पादक

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