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समय पर नहीं खुलते स्कूल,शिक्षकों का इंतजार कर लौट जाते हैं बच्चे

सीहोर से शिवराजसिंह राजपूत की रिपोर्ट

शिवराजसिंह राजपूत
इछावर,एमपी मीडिया पॉइंट

जनपद शिक्षा केंद्र इछावर के अंतर्गत ग्राम राजपुरा का शासकीय प्राथमिक शाला। जिसकी दीवार पर लिखा है सब पढ़ें सब बढ़ें। दीवार के बीच में ही लिखा है, यदि मनुष्य सीखना चाहे तो उसकी हर भूल उसे कुछ शिक्षा दे सकती है। लेकिन जब स्कूल ही समय पर नहीं खुल रहा है। तो इन सब बातों का क्या मतलब। शनिवार को सुबह 11:10 बजे तक राजपुरा के शासकीय माध्यमिक स्कूल में स्कूल में ताला लगा था। गांव के छोटे-छोटे बच्चे स्कूल के बाहर खड़े रहकर काफी इंतजार करने के बाद अपने-अपने घर लौट गए। ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश स्कूलों की यही स्थिति देखने को मिली। वहीं जिम्मेदार अधिकारी इन स्कूलों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

बता दें कि पिछले 2 वर्षों से कोरोना के कारण स्कूली छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। लेकिन इसके बाद भी सरकारी स्कूलों में पदस्थ शिक्षक मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों के खुलने का समय 10.30 बजे है। लेकिन यह स्कूल 11 बजे के बाद ही खोले जाते हैं। यही नजारा शनिवार को इछावर विकासखंड के दूरस्थ ग्राम राजपुरा और टाकपुरा में देखने को मिला। यह दोनो स्कूल निर्धारित समय से पौन घंटे से एक घंटे के बाद खुले। कई बच्चे स्कूल खुलने का इंतजार करने के बाद लौट गए।

शासकीय प्राथमिक शाला राजपुरा

खुलने का समय – 10.30 बजे

आंखों देखी- शनिवार को 11.15 बजे स्कूल खुला। बच्चे बाहर खड़े शिक्षकों के आने का इंतजार कर रहे थे। केवल 6 बच्चे स्कूल के बाहर खड़े थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिक्षकों की मनमानी के कारण छात्र छात्राओं का भी स्कूल से मोह भंग हो रहा है। वही ग्रामीणों ने बताया कि शिक्षक कब आते हैं और कब चले जाते हैं पता नहीं चलता। यहां सरकारी स्कूलों में पढ़ाई भगवान भरोसे है।

स्कूल में पढ़ाई की जगह झाड़ू-पोछा लगाते हैं बच्चे

केंद्र सरकार एवं प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा के स्तर को बढ़ावा देने के लिए ढीडोरा पीटा जा रहा है वहां दूसरी तरफ मध्यप्रदेश के जनपद केंद्र इछावर में सरकार की योजनाओं का सरकारी स्कूलों में पलिता लगाया जा रहा है। जहां छोटे- छोटे मासूम बच्चों के पढ़ाई के नाम पर जीवन के साथ खिलवाड़ किया जाता है। बतादे की केंद्र एवं प्रदेश सरकार जहां एक तरफ गरीब मासूम बच्चों को पढ़ाई के लिए वचनबद्ध है दूसरी और सरकारी स्कूलों में इस बात से बेखबर हैं। उन्हें बस अपनी तनख़्वा से मतलब है बच्चे पढ़े या सरकारी विद्यालय की साफ़ सफाई करें।

आपको बता दे की राजपुरा के सरकारी स्कूल में छोटे छोटे मासूम बच्चों से पढ़ाई के बजाए सफाई करवाई जाती है। जब राजपुरा स्कूल प्रभारी प्रेमनारायण वर्मा से बात की गई तो उनकी बात सुनकर आप भी चौंक जाएंगे। उन्होंने बताया की स्कूल में कोई सफाई कर्मचारी नही है। सफाई बच्चों से नही कराएं तो किस से कराएं। अब इसे प्रदेश सरकार की कमी कहा जाए या बच्चों की मजबूरी या प्रिंसिपल का डर।जय हो प्रदेश सरकार की। स्कूल में जब बच्चे झाड़ू लगा रहे थे तब प्रिंसिपल बड़े ही आराम से बाहर खड़े होकर धूप का आनंद ले रहे थे।

जब स्कूल प्रभारी से पूछा गया कि इस तरह से बच्चों से झाड़ू क्यों लगाई जा रही है । पहले तो उन्होंने कैमरे के सामने आने से मना कर दिया,लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि हमारे स्कूल में कोई भी सफाई कर्मचारी नही है स्कूल में गंदगी हो जाती है बस बच्चों से थोड़ी सी सफाई करा लेते है। बच्चों से झाड़ू लगाकर सफाई करवाई गई है इसमें गलत क्या है। यानी केंद्र सरकार एवं प्रदेश सरकार के शिक्षा पर ज्यादा ज़ोर देने के बावजूद भी सरकारी स्कूलों में इस तरह के काम कराना आम बात हो गई है। किसी की कितनी भी शिकायत हो पर किसी को कोई फर्क नही पड़ता। अब देखना यह है कि इस तरह का मामला इछावर विकासखंड के स्कूल से निकला है अब अधिकारी एवं कर्मचारी इस पर क्या कार्रवाई करते हैं।

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यदि इस तरह का मामला है तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।
रमेश चंद मेवाड़ा
बीआरसीसी इछावर

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