सीहोर

प्रधानमंत्री आवास योजना एक साल से तीसरी-चौथी किस्त का इंतजार…

इछावर

नफीस खान
नादान(इछावर),एमपी मीडिया पॉइंट

प्रधानमंत्री आवास योजना में आवास का लाभ लेने के लिए कई बार ग्राम पंचायत कार्यालय के चक्कर काटकर थक गए है। लेकिन कोई हमारी फरियाद सुनने को तैयार नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र परिवारों को किस्तें नहीं मिल रही है। सरकार भले ही गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत आवास दिलाकर लाभान्वित करने का दावा कर रही है,लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर ही बयां कर रही है। अभी भी कई गरीब परिवार इस आवास योजना से वंचित है। लोगों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना में आवास का लाभ लेने के लिए कई बार ग्राम पंचायत कार्यालय के चक्कर काटकर थक गए है, लेकिन कोई हमारी फरियाद सुनने को तैयार नहीं है।मामला इछावर जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत अलीपुर,गुराड़ी,नादान ब्रिजिशनगर,सहित पंचायतें हैं। जो किस्त के अभाव में दर-दर भटक रहे हैं। हितग्राही जब पंचायत के कर्मचारी अधिकारियों से पूछा जाता है तो उनका एक ही जवाब मिलता है। कि बस एक-दो दिन में किस्त डर जाएगी आपकी, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है पिछले 8 महीनों से हितग्राही सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।लेकिन अभी तक राहत नहीं मिली यह समस्या एक दो गांव की नहीं बल्कि पूरे सीहोर जिले का यही हाल हैं प्रधानमंत्री आवास योजना में आवास का लाभ लेने के लिए कई बार ग्राम पंचायत कार्यालय के चक्कर काटकर थक गए है। लेकिन कोई हमारी फरियाद सुनने को तैयार नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र परिवारों को किस्तें नहीं मिल रही है। सरकार भले ही गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत आवास दिलाकर लाभान्वित करने का दावा कर रही है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर ही बयां कर रही है। अभी भी कई गरीब परिवार इस आवास योजना से वंचित है। लोगों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना में आवास का लाभ लेने के लिए कई बार ग्राम पंचायत कार्यालय के चक्कर काटकर थक गए है, लेकिन कोई हमारी फरियाद सुनने को तैयार नहीं है। प्रधानमंत्री आवास योजना 8 महीनों से तीसरी चौथी का इंतजार है। ग्रामीण क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राहियों को किस्तें नहीं मिल रही है। प्रशासन के भरोसे अनेक परिवारों ने आशियाने बनाने के लिए हिम्मत जुटाकर अपने कच्चे मकान तुड़वा दिए। लेकिन अब हितग्राहियों को समय पर किस्त नहीं मिल रही है। जिसके कारण अधूरे पड़े आवासों से परिवार परेशान है। किस्त के चक्कर में पिछले कई महीनों से आशियाने अधूरे पड़े है। किस्त मिलने के बारे में अधिकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे है।

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