सीहोर

रहवासियों ने श्‍मशान घाट की जमीन पर अवैध कब्जा कर निर्माण के विरोध में खोला मोर्चा

कार्यवाही की मांग को लेकर एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

इछावर,एमपी मीडिया पॉइंट

प्रदेश सरकार लगातार अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कर रही है लेकिन अतिक्रमणकारी शासकीय जमीनों पर तो कब्‍जा कर ही रहे हैं। श्मशान घाट की जमीन को भी नहीं बख्‍श रहे। मामला इछावर के कबानी वाले श्मशान में का हैं। जहां शमशान की भूमि पर मुस्लिम समुदाय अवैध कब्जा कर निर्माण कर रहे हैं।

इसी को लेकर रहवासियों ने आज इछावर एसडीएम विष्णु प्रसाद यादव को एक ज्ञापन सौंपा ज्ञापन में बताया गया कि हमारे पूर्वजों के समय से ग्राम विनायकपुरा में भूमि खसरा नम्बर 49 रकबा 1.94 एकड़ शमशान भूमि स्थित हैं। हमारी पीड़ी उक्त शमशान में ही अंतिम संस्कार एवं अन्य क्रियाकर्म निरंतर होते चले आ रहे है। यह कि उक्त शमशान की भूमि से मुस्लिम समुदाय का इदगाह की भूमि लगी हुई हैं। जिसका खसरा नम्बर 49/2 रकबा 0.85 एकड़ भूमि है। जिसके संपूर्ण भाग पर गर पूर्व से ही बाउण्ड्रीवाल निर्मित होकर कई वर्षो से ईदगाह है। परंतु मुस्लिम समुदाय द्वारा ईदगाह की भूमि के रकबे एवं बाउण्ड्री को छोड़कर हमारे समाज की शमशान उक्त भूमि पर अवैध कब्जा कर उस पर बीम कॉलम खोदकर पक्का निर्माण कर अतिक्रमण किया जा रहा है। पूर्व मे वर्ष 2011 मे भी उक्त शमशान के खसरे नम्बर की भूमि पर मुस्लिम समुदार द्वारा अतिक्रमण करने की कोशिश की गई थी। जिसको शासन द्वारा हटाया गया था। परंतु अब पुनः मुस्लिम समुदाय द्वारा हमारे समाज की उक्त शमशान की भूमि पर अवैध कब्जा कर पक्का निर्माण किया जा रहा है। जिसका एक आवेदन पूर्व में भी दिनांक 24/11/2021 को दिया जा चुका है। यह कि संलग्न आवेदन पत्र के परिपालन मे पुनः अनुविभागीय अधिकारी इछावर के द्वारा पूर्व में कार्य बंद कर दिया गया था। परंतु अभी 2-3 दिनो पुनः अवैध निर्माण कार्य आरंभ किया जा चुका है। इस मामले में आवेदक गणों का कहना है कि कार्यवाही नही हुई तो आन्दोलन करने पर मजबूर होगें जिसकी जिम्मेदारी शासन की होगी। यह कि हम द्वारा उक्त भूमि की नपवाई हेतु आवेदन पूर्व में लोकसेवा केन्द्र में दिया जा चुका है। अतिक्रमण किये जा रहे निर्माण कार्य को रोका जावें। एवं उचित कार्यवाही की जाय। ज्ञापन सौंपने वालों में शिवकुमार गुप्ता,सुशील कुमार,राहुल गुप्ता,प्रवीण गुप्ता,अनिल गुप्ता, संतोष गुप्ता,आदि उपस्थित रहे।

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