लेख

चला गया शब्द ,लेखन और वाणी का जादूगर

भावांजलि

जयंत शाह

आज के दौर में जिस तरह की टेलीविजन पत्रकारिता हम देख रहे हैं| क्या कोई कल्पना कर सकता है| एक ऐसे भी पत्रकार हुए, जो सरकार द्वारा नियंत्रित दूरदर्शन के कार्यक्रम में कोई एंकर अपने सामने बैठे और सरकार के शक्तिशाली मंत्री से यह कहे कि उनके कामकाज के आधार पर वे 10 में से केवल तीन अंक देते हैं।
सन् 80 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित बहुत ही लोकप्रिय कार्यक्रम “जनवाणी” मे मंत्रियों से
जिस तरह के सवाल विनोद दुआ पूछते और टिप्पणी करते थे, ऐसी कल्पना करना उस जमाने में भी और आज के दौर में भी एक असंभव सी बात है।

जैसा कि आज सोशल मीडिया पर मार्मिक टिप्पणियाँ देखने को मिल रही हैं उससे जाहिर होता है कि विनोद जी किस ओहदे के नामानिगार थे। उनकी भाषा का संतुलन अतुलनीय है। ऐसी शख्सियत को खोना आज दुख का विषय है। विनोद जी को खोने का गम पत्रकारिता जगत में ही नहीं राजनीतिक गलियारों में भी है । यह सबसे बढी बात है।
मैं मीडिया पॉइंट के संपादक होने के नाते सभी लाखों पाठकों की तरफ से विनम्र भावांजलि अर्पित करता हूँ।

जयंत शाह,सीहोर

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