साहित्य का सोपान

उस पर प्यार आया है…

उस पर प्यार आया है

एक बार फिर उससे …..
हां मुझे प्यार हुआ है
थोड़ा बहुत नहीं बेहिसाब हुआ है
मैं ये नहीं कहती कि ,
क्या ………???
पहले मुझे उससे प्यार नहीं था
बिल्कुल था और बेहद था …..
अरे उससे तो हर पल प्यार है
उसकी मासूमियत ..
उसकी चुलबुलाहट ….
उसकी सादगी …
उसकी दीवानगी …
उसका मुझ पर यूं
बेपनाह मर मिटना
मुझे जरा सा सुनकर ही
पूरे दिन खुशियों का आ जाना….
मेरी व्यस्तता पर गुस्सा दिखाना
वह भी थोड़ा सा नहीं जी…….
बहुत सारा वाला ….झूठा मूठा गुस्सा ..
थोड़ी अकड़ दिखाना
तमतमाकर लड़ना .।..और
अपना प्यार और हक जताना
मेरी बेसिर पैर की बातों को भी
अपनी पलकों पर सजा लेना
मुझे डांटना ,मुझे सुनना ,
यही एक अदा उनकी बेहद भा जाती है
अपनी ढेरों परेशानियों में भी
मेरी गुमसुमगी को भी
वह बहुत अच्छे से जानता है
अपने जीवन के हर पल में
वो….. बस मुझे हमेशा के लिए
पा लेना चाहता है…….
हां अब कैसे ना कहूं कि ,
मैं मरती हूं…….. उसकी इन बातों पर
उसके मासूम एहसासों और
पाकीजा जज्बातों पर
मेरी नाराजगी को परे रखकर
मेरे मन की व्यथा को भी
जो समझ ले बिना कहे
मैं…………………………….
इसे अपनी खुशनसीबी ना कहूं
तो और क्या कहूं ……

हां ………..
मैं जीती हूं उसमें …….
वह सांस लेता है मेरी धड़कनों में
फिर कैसे ना कहे दूँ
लाख कोशिशों के बावजूद
ये…..मन नहीं रोक पाता मुझे
उसे चाहने से ……..

हाँ बेशक….तभी तो….

“एक बार नहीं ,हर बार मुझे….
उस पर प्यार आया है ….
थोड़ा बहुत नहीं… बेहिसाब आया है….

प्रीति धुर्वे “प्रीत”
ग्वालियर, मप्र

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