सीहोर

तुम इतना क्यों बड़-बड़ा रहे हो ….

क्या गम है जिसको छुपा रहे हो....

जयंत शाह,सीहोर

देश और प्रदेश में दल सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी मे क्या कुछ कुछ अंदरूनी मंथन चल रहा है ? जो आने वाले दिनों में अंदरूनी राजनीतिक उठापटक में बदल सकती है। जिसके दबाव में मध्यप्रदेश की भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता असमंजस की स्थिति में है। कहीं ना कंही उनके कहीं दिलो-दिमाग में जो स्थिति है।

वह स्थिति ऐसी है
जो उन से उगलते बन रही है ना निगलते बन रही है। यानि गले की हड्डी।
यही कारण है कि पिछले दिनों चाहे वह प्रदेश के मुख्यमंत्री हो। चाहे मंत्री बिसाहूलाल सिंह हो या भाजपा के आष्टा विधायक हों..।

महसूस कुछ और कर रहे हैं
कहना कुछ चाह रहे हैं..
और उनके मुंह से बोल कुछ अलग ही निकल रहे हैं…
जिन्हें राजनीतिक और समाचार जगत की भाषा में आजकल बिगड़े बोल कहा जा रहा है…
इन्हें आप इन तीन बयानों से समझ सकते हैं….

और अंत में….

सत्ता का सुरुर, खुद पर इतना गुरुर….,
बाज आएं अपनी हरकतों से प्रजातंत्र के पहरेदार

पिछले कुछ दिनों से देखने में आ रहा है कि मध्यप्रदेश के मंत्री बोलों में अनियंत्रित हो गए हैं। सामाजिक रुप से कीचड़ उछाल रहे हैं। वही मुख्यमंत्री भी पीछे नहीं हट रहे। वह पत्रकारिता पर निशाना साध रहे हैं। यानि कांच के महलों में रहने वाले दूसरों के घर पर पत्थर फेंक रहे हैं। बात अखबारों के मालिक की हुई मगर आहत पत्रकारों का ह्रदय हुआ। क्या इसका मुआवजा देने को तैयार है सरकार♦

स्व. दुष्यन्त  कुमार याद आ रहे हैं जो कहते हैं कि

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