सीहोर

अस्पताल को अस्पताल रखें उसे दुल्हन न बनाएं, इलाज़ में फिसड्डी इछावर अस्पताल

मरीज़ों के इलाज़ के बजाए अस्पताल में मनाए जाते डॉक्टरों के जन्मदिवस

इछावर,एमपी मीडिया पाइंट

पिछले दौरान कोराना के कारण परलोक सिधार गए लोगों के परिजनों को रिकार्ड आपूर्ति के लिए डोर-टू-डोर भटकना पड़ रहा है। हाल ही में दर्जा प्राप्त सिविल अस्पताल इछावर का है , जहां मृतकों के परिजन इधर से उघर भेजे जा रहे हैं। भटक रहे हैं।
सरकार ने परिजनों के लिए 50-50 हजार रुपये भेजे लेकिन उसे प्राप्त करने परिजनों को पसीना आ रहा है। अस्पताल में नेतागिरी चल रही है। और जहां मरीज़ों का इलाज़ होना चाहिए वहां डाक्टर का जन्मदिवस मन रहा है। करोड़ों रुपये के मूल्य की मशीनें धूल चाट रही हैं। मुट्ठीभर स्टाफ है वह भी मुख्यालय पर नहीं रहता। मरीज़ों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार तो जैसे इस अस्पताल का शगल बन गया है। कहने के लिए इछावर का सिविल अस्पताल स्वच्छता (कायाकल्प योजना) को लेकर प्रदेश में पहचाना जाता है लेकिन अन्दरूनी हालात बद से बदतर हैं।
खासबात यह है कि अस्पताल में इलाज़ कम राजनीति ज्यादा होती है। “यानि हाथी के दांत दिखाने के ओर खाने के ओर..”सरपंच से लेकर विधायक को तवज्जो देना ही बस यहां के कर्मचारियों और अधिकारियों की ड्यूटी है। नागरिकों का कहना है कि अस्पताल को अस्पताल रखिये उसे दुल्हन न बनाएं। नागरिक बताते हैं कि हमें इलाज़ कराते समय अपमान भी सहन करना पड़ता है। अदने से कर्मचारी दुर्व्यवहार करते हैं। स्टाफ मुख्यालय पर रहता नहीं। अधिकांशतः सीहोर से आन‍ा-जाना करते हैं।

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