साहित्य का सोपान

माँ

#माँ

माँ की एक सुन्दर – सी मुस्कान ,
कर देती घर – आँगन को खुशहाल ,
देख हमारी कामयाबी उनकी बढ़ती शान ,
आंखें उनकी चमक उठतीं, जैसे हों मशाल।

दुनिया से वो लड़ जातीं,
मेरे लिए हरबार भिड़ जातीं ,
कुछ भी मांगूँ , मुझे झट दे देतीं
मुझको कभी नहीं कहती हैं, ना!

हमेशा हरतीं रहतीं मेरी तकलीफें,
हर छोटी बात पर करती वो तारीफें ,
कभी ना माँगतीं अपने कामों की कीमतें
न बतायी अपनी दर्द और तकलीफें।

करूंगा मैं अपनी पूरी कोशिश
देने की उनको सारे ऐशो आराम
पूरी करूंगा उनकी हर ख्वाहिश
वो मेरी कौशल्या मैं उनका राम।

चित्रक सिंह,
उम्र – दस साल
कक्षा – पांचवी

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