साहित्य का सोपान

कलम

3
कलम

कोरे काग़ज़ पे
कलम ,,,,उकेरे
भावनाएँ…
कई ,
अनगिनत,,,शब्दों के
मन के ख़ाली
पन्नों पर ,,,रच डाले
कितने ही रंग ,,,,जीवन के !

ख़ुशियों की स्याही
काग़ज़ लाल
नीला आकाश
घिरा अवसाद
ग़मों में हुआ
काला स्याह शब्दों
रंग स्याही का,,घुला

सँवारी कलम
क़िस्मत ,,,किसी,, की
बिगड़ी…इनसे
ज़िन्दगी ….भी कभी
मन को पढ़
गढ़ती ….भाव

लम्बी ,,,पतली
रूठे ,,,गर …क़िस्मत
करती घाव गंभीर
शब्दों के ….माध्यम ,,,रचती
प्रेरक….. कहानियाँ
देती …..कलम
एक ….नई …..पहचान !

नवाज़ती
नई नई उपाधियाँ
क़लमकार …कलम के जादूगर
इत्यादि

मगर ,
फ़ास्ट ….हो …. रही ,,,,ज़िन्दगी
हुई,,,तकनीक ,,,नई
घटी ,,
क़ीमत ….कलम ….की
देने….लगे ,,,तरजीह
सभी
लैपटॉप …….मोबाइल
और,
होने ….लगे
तब्दील,,,शब्द ,,टाइपिंग मे !

कलम बिना
कइयों के ,,अब ,,भी
होती ….नहीं
कहानी….. पूरी
काग़ज़ ……कलम
की ,,,है …संगति
वर्षों …पुरानी

संस्कृत श्लोकों से
ताम्रपत्रों ,,पर
हुई
प्रथम शुरुआत
सफ़रनामा,,,,कलम…की
पर ,,
नई …..टेक्नोलॉजी
नये ,,व्यवस्थाओ,,,ने
कम ..कर …गई
महत्ता ….कलम …..की !!!!

पूनम हर्षवर्धन
पटना ( बिहार )

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Close