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शक्ति स्वरूपा की दयनीय स्थिति क्यों…

शक्ति स्वरूपा की दयनीय स्थिति क्यों

जैसा कि हम सभी जानतें हैं कि पूरे विश्व में भारत एकमात्र ऐसा देश है जहाँ कई धर्म और भाषाएं बोली जाती है। जितने प्रदेश उतने रीतिरिवाज खासतौर से धार्मिक आयोजन,कई पर्व, कई उत्सव ,इनकी ख़ासियत देवी पूजन,नवरात्रि विशेष मायने रखती है। जहाँ लगातार नव दिवसीय दुर्गाजी के नौ रुपों की विधिवत पूजा अर्चना की जाती है।बड़े पैमाने पर हर साल मूर्ति विसर्जन भी। भक्तिमय वातवरण में कन्याओं का पूजन कर यह पर्व समाप्ति की उद्घोषणा करता है।
वहीं दूसरी ओर एक पहलू यह भी और सवाल भी…कि ऐसे देश में जिस देश को माँ भारती का दर्ज़ा दिया गया है। वहाँ कन्याओं की,भ्रूण हत्या क्यों?
क्यों स्त्रियों की दशा दयनीय हैं?
क्यों माता तुल्य स्त्रियों का बलात्कार होता ? क्यों उन्हें इन विभत्स स्तिथियों का सामना करना पड़ता है ?
क्यों उन्हें अपनी अस्तित्व के लिए लड़ना पड़ता है ? फिऱ क्यों उन्हें विवाह वेदी के नाम पर मानसिक शोषण या दहेजप्रथा के नाम पर मरना पड़ता हैं? जबकि नवदेवीयों के सारे रूप अद्भुत है।कहीं वे ममता की मूरत है तो कहीं शिक्षा देती शिक्षिका, कही अन्नपूर्णा तो कहीं सुश्रुत करती सुश्रुषा, कही रणचंडी तो कहीं कालरात्रि ,शक्तिरूपा नारी ।
फिऱ क्यों इस महापर्व के बाद उन्हें मानसिक यंत्रणाओं से गुजरना पड़ता है ? पहले तो कई सवाल जवाब मुश्किल है पर यह सच है कि स्त्री शक्ति नहीं तो सृजन ही नहीं क्योंकि अकेला पुरुषसत्तात्मक समाज सृजन कर ही नहीं सकता जो नीम कड़वी है।बेशक़ बाहुबल से मजबूत पर उसका आधार सिर्फ़ और सिर्फ़ शक्तिरूपा एक स्त्री ही है।

सुरेखा अग्रवाल स्वरा
लखनऊ, उप्र

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