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अफगानिस्तान और पाकिस्तान में है चमत्कारिक मां जगदम्बा का दरबार

जयंत शाह

एमपी मीडिया पॉइंट के माध्यम से हम नवरात्रि पर्व के आठवें दिन यानि “दुर्गा अष्टमी” पर आज हम चलेंगे देश की सीमाओं को लांघ कर अफगानिस्तान और पाकिस्तान।

जी हां ठीक सुना आपने क्योंकि पराशक्ति मां भगवती को किसी एक सीमा में नहीं बांध सकते।
मां की शक्ति असीमित है जहां मनुष्य की सोच समाप्त होती है वहां से उसकी की शक्ति का विस्तार होता है।
1, हिंगलाज में तुम्हीं भवानी , महिमा अमित न जाए बखानी।।
2, दहशतगर्दी की क्या बिसात है,
जिनके पास आसमाई मां का साथ है।।
उपरोक्त दोनों पंक्तियों से आप समझ गए होंगे आज हम माता रानी के दो प्रमुख स्थानों की यात्रा पर चलेंगे।अफगानिस्तान जो आज चर्चाओं में है आतंकवाद एवं दहशतगर्दी के लिए।
भले ही आज वहां आतंकी साया है,
परंतु उसके बावजूद भी भक्तों के उपर शक्तिशाली ईश्वरी मां दुर्गा की माया है।
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल मे आसा पहाडी पर स्थापित है देवी का अद्भुत चमत्कारिक स्थान। जिसका नाम है “”आसमाई माता””
जिसे आशा की देवी भी कहा जाता है।

यथार्थ भी है क्योंकि जहां अफगानिस्तान तालिबानी दहशत के माहौल में जी रहा है वहां यह माता मंदिर आशा स्वरूप है।अफगानी हिंदुओं और मुसलमानों में जीवन की उम्मीद, अमन और सौहार्द की उम्मीद को लगातार जीवित रखे हुए है।
इस मंदिर की प्राचीन दंतकथा है कि जहां एक तपस्वी151 वर्ष पूर्व तप करने आया था लगातार तप करते करते वह एक पत्थर शीला बनकर उस पहाड़ी पर स्थापित हो गया।
उस पत्थर को आज “”पंजशीर के जोगी””
नाम से जनते हैं।
मां आशामाई अपने भक्तों को अन्न ,धन और जीवन प्रदान करती हैं। कहा जाता है मां अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए आज भी शेर पर सवार होकर आती है।
प्रमुख बात यह है कि वर्तमान घटनाक्रम में भी भक्तों ने माता के प्रति अपनी आस्था बनाए रखी एवं इन कठिन परिस्थितियों में भी माता के दरबार में पूजन एवं भक्ति आयोजित की गई।

हिंगलाज माता दरबार (पाकिस्तान)

पाकिस्तान में विराजित मां हिंगलाज जो हिंदुओं के लिए शक्ति पीठ है, और मुस्लिमों के लिए “”नानी पीर””
यह शक्तिपीठ हिंगलाज नदी के किनारे पर्वत पर पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बसा हुआ है।
मान्यता अनुसार हिंगलाज जी वह स्थान है जहां पर माता सती का सिर गिरा था। इतिहास में उल्लेखित है यह मंदिर 2000 वर्ष पूर्व भी यही विद्यमान था।
कहा जाता है यहां मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी आए थे, कई आध्यात्मिक संत जैसे गुरु गोरखनाथ गुरु नानक देव दादा मखान भी यहां मां के दर्शन करने आये थे। यहां बाबा भोलेनाथ भीम लोचन भैरव रूप में प्रतिष्ठित है।मां हिंगलाज प्रमुख रूप से चारण वंश के लोगों की कुलदेवी मानी जाती है। यह मंदिर हिंदू मुस्लिम भाईचारे की अद्भुत मिसाल है ।

भगवती आशामाई एवं भगवती हिंगलाज महारानी की चरणों में बार-बार वंदन 🙏🙏

जयंत शाह

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