धर्म

मां तुझे प्रणाम — जयंत शाह

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मां तुझे प्रणाम…
महाराज सा आपको प्रणाम

स्थानीय संपादक जयंत शाह को परम पूज्य साध्वी शाश्वत पूर्णाश्री जी महाराज साहब ने जैसा कि बताया 

आज से प्रायः 3500 वर्ष पूर्व वाराणसी नगर मे अवतरित हुये जैन परंपरा के 23 वें तीर्थंकर पूरषादानीय श्री पार्श्वनाथ भगवान की परम आराधिका
मां पद्मावती ,जो भगवान को याद करने वाले,पूजने वाले,आराधना करने वाले, समस्त भक्तों की सहायता करने में सदैव
तत्पर रहती हैं ।
सिर पर नाग की फण, एक हाथ मे कमल,एक हाथ मे वज्र ,एक हाथ मे नागपाश ,एक हाथ मे बीजोरा फल ग्रहण करने वाली मां नाग के आसन पर विराजमान होती हैं ।
सुंदर स्मीत सभर मुखाकृति और आंखों में भक्तों के प्रति अपार प्रेम बरसाती मां पद्मावती अपने शरण में आने वाले प्रत्येक भक्तों की झोली खुशियों से भर देती हैं। भारतवर्ष के दक्षिणी प्रांत कर्नाटक के शिमोगा जिले के ग्राम हुमचा
मे स्वयंभू प्रकट होकर स्थापन हो गई । अपने मस्तक पर भगवान पार्श्वनाथ जी को धारण करके जगत के जीवो का दुख हरती हैं।
भगवती पद्मावती के मुख्य स्थानों में अग्रसर है गुजरात प्रदेश के समृद्धि शाली शहर अहमदाबाद मे प्रसिद्ध गोडीजी पार्श्वनाथ मंदिर
मे विराजित रक्तवर्णा मां पद्मावती जो नरोड़ा पद्मावती के नाम से प्रसिद्ध है।
ऐसे तो मां पद्मावती के 108 नाम है और प्राचीन भारत में 108 स्थान भी थे परंतु आज उसमें से किंचित मात्र मिलते हैं जैसे गुजरात के पाटन जिले के चारूप नाम के गांव में विराजमान है, और देश की आर्थिक राजधानी मुंबई वालकेश्वर के मां पद्मावती जी की ज्योत अवर्णनीय है, नवरात्रि पर्व में मां पद्मावती के स्वरूप का ध्यान करने मात्र से इच्छित प्राप्ति होती है मां पद्मावती के प्रत्येक स्थान में भक्त अपनी सर्व मनोकामना पूर्ण करते हैं और मां की भक्ति में लीन हो जाते हैं।

परम पूज्य साध्वी शाश्वत पूर्णाश्री जी महाराज साहब

दरबार में मैया के दुख-दर्द मिटाए जाते हैं,
गर्दिश के सताए लोग यहां सीने से लगाए जाते हैं,

और अंत में…

जिन भक्तों पर मेरी मय्या की कुछ खास कृपा हो जाती है।
उन्हीं को संदेशा जाता है , वही दर पर बुलाये जाते हैं।

जयंत शाह

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