आस्थाधर्म

जिनके आशीर्वाद से होता है फर्श से अर्श तक का सफर, प्रधानमंत्री मोदी के सफलता की शुरुआत भी इसी चमत्कारिक देवी स्थल से हुई।

धर्म - आस्था

नवरात्रि विशेष
—————–
जिनके आशीर्वाद से होता है फर्श से अर्श तक का सफर,
प्रधानमंत्री मोदी के सफलता की शुरुआत भी इसी चमत्कारिक देवी स्थल से हुई।

जयंत शाह

मेरी कोशिश है कि शारदीय नवरात्रि के दौरान सभी देवी भक्त मीडिया पॉइंट के माध्यम से मां भगवती के प्रत्येक स्वरूप में वंदन कर सकें ।

आज हम मां के दर्शनार्थ चलेंगे भारतवर्ष के पश्चिमी छोर पर स्थित गुजरात के महत्वपूर्ण जिले कच्छ में ।
मां के “शाकंभरी” स्वरूप जो आज मां “”आशापुरा””के नाम से विश्व प्रसिद्ध है।
मां आशापुरा को कच्छ समुदाय की कुलदेवी के रूप में माना जाता है।
मां आशापुरा मां जगत जननी भगवती का अन्नपूर्णा स्वरूप है।
जिसमें मां अपने हाथों से बच्चों का पालन पोषण करती है।
अथवा मां परा रूप मे अपने भक्तों की आत्मिक तृषा को शांत करती है।
आशापुरा माता का मुख्य मंदिर
“”माता नी मढ”‘ कच्छ के कंठीपर क्षेत्र मे स्थित है ।मां आशापुरा जहां एक और चौहान राजपूत वंश की कुलदेवी है वहीं कच्छी समाज मे गौसर, पोलडिया आदि गोत्र को अपना आशीर्वाद और छत्रछाया सीधे ही प्रदान करती हैं । इस मंदिर का निर्माण जडेजा साम्राज्य के शासनकाल 14 वीं शताब्दी में हुआ था।
मंदिर के अंदर मां आशापुरा की 6 फीट ऊंची लाल रंग की प्रतिमा स्थापित है।
मां आशापुरा का उल्लेख पुराणों एवं
रूद्रयमल तंत्र में मिलता है।
मन में विश्वास रखे तो माता कई लोगों को यहां पर
“काली गौ माता”
के रूप में दर्शन दे चुकी हैं ।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने कच्छ में अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत माता के मढ पहुंचकर मां आशापुरा के दरबार में शीश झुका कर ही की थी।

मां के दरबार में सिर झुकाने के बाद
विजयश्री अवश्य वरण करती है एवं हमारे मन की सभी आशाएं पूरी करती है।

जो सच्चे दिल से,
द्वार मैया के जाता है,
वो मुह मांगा वर,
जग जननी से पाता है।
फिर रह न वह कंगाल सखी,
हो जाए वह मालामाल सखी।
तुझे क्या बतलाऊं,
मां है कितनी दीनदयालु सखी।
माता के मढ में विराजी
मां आशापुरा हम सब की आशा पूरी करें ऐसी कामना के साथ
जय मां आशापुरा🙏
जयंत शाह

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Close