साहित्य जगत

सीहोर नगर पर है माता रानी की कृपा, पुरातन काल से मनाया जा रहा है “नवरात्रि त्योहार”

जयंत शाह

सीहोर मंडी स्थित माता मंदिर चौराहा जाना जाता है।1975 मे स्थापित भगवती राजराजेश्वरी
मां दुर्गा के विशाल शिखर युक्त मंदिर के लिए।
आज से लगभग 49 वर्ष पूर्व सन 1962 मे मंडी क्षेत्र के उत्साही युवकों ने बुजुर्गों के आशीर्वाद एवं सलाह से “नवयुवक संघ” नामक धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्था का गठन किया। नवयुवक संघ मंडी द्वारा प्रतिवर्ष नवरात्रि में नवरात्रि में दुर्गा प्रतिमा की स्थापना की जाती थी एवं दशहरे पर विसर्जन की परंपरा थी।संगठन के तत्वाधान में प्रतिवर्ष श्री रामलीला का मंचन, राम बारात का भव्य चल समारोह, एवं भव्य एवं आकर्षक आतिशबाजी के साथ दशहरा उत्सव का आयोजन किया जाता था। मंडी क्षेत्र में मनाये जाने वाले भव्य दशहरे उत्सव में दूर दूर से लोग रामबरात ,आतिशबाजी, राम रावण युद्ध एवं रावण दहन का आकर्षक कार्यक्रम देखने के लिए वर्ष भर इंतजार करते थे। नवयुवक संघ के कार्यकर्ताओं का अनुशासन एवं धार्मिक भावना पूरे क्षेत्र के लोग प्रभावित रहे।
सन् 1975 मे मां भगवती की कुछ ऐसी प्रेरणा हुई माताजी की स्थाई प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय क्षेत्र के नागरिकों के सहयोग से समिति द्वारा लिया गया।
छोटे से मंदिर में माता जी की प्रतिमा स्थापित की गई। पूर्ण विधि-विधान के साथ जब से मां भगवती की प्रतिमा स्थापित हुई धीरे धीरे आस्थावान लोगों की मनोकामनायें भगवती दुर्गा के आशीर्वाद से पूरी होने लगी।
समय के साथ शनै शनै मंदिर का कायाकल्प हुआ एवं आज माता मंदिर अपने दिव्य-भव्य एवं आकर्षक स्वरूप में भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है।मंदिर में माता जी के अलावा हनुमान जी एवं भैरव नाथ भी विराजमान है।
चैत्र एवं शारदीय दोनों नवरात्रि मैं माताजी के घटस्थापना के साथ जब
पर्व प्रारंभ होते हैं तभी से ना केवल क्षेत्र के बच्चे से लेकर बड़े तक बच्चियों से लेकर बुजुर्ग महिला तक बल्कि देश विदेश में रहने वाले वे सभी लोग जो माता जी की कृपा का अनुभव कर चुके हैं वह सीहोर मां भगवती के दर्शन के लिए सीहोर पहुचने का प्रयास करते हैं।
विशेषकर सुबह और संध्या आरती का लाभ लेने की इच्छा सभी के मन में रहती है।
पर्व के दौरान प्रतिदिन होने वाली आरती एवं अष्टमी की रात्रि 12:00 बजे होने वाली महानिशा आरती में शामिल होने के लिए सभी लोग प्रयासरत रहते हैं। नवमी के दिन होने वाले विशाल भंडारे की प्रतीक्षा भी वर्ष भर भक्तों को रहती है। शहर के बाहर रहने वाले भक्त यदि किसी कारण से सीहोर ना आ पाए तो भी अपना सहयोग प्रदान करने के लिए समिति के लोगों से फोन पर चर्चा करते हैं एवं यथा योग्य सहयोग करने का प्रयास करते हैं। एवं मां के आशीर्वाद की अपेक्षा रखते हैं। नवरात्रि के नवमी के दिन पूर्ण विधि-विधान से होने वाले हवन की प्रतीक्षा भी श्रद्धालु महीनों से करते हैं। क्षेत्र के वरिष्ठ आध्यात्मिक विद्वान परम दुर्गा भक्त पंडित हरि भाई तिवारी आरती एवं मंत्रोच्चार के बाद जब माताजी का जयकारा लगवाते हैं।

 

उस समय का दृश्य देखते ही बनता है। पूरा माहौल जय माता दी के गगन भेदी नारों से गुंजायमान हो जाता है ।
अपनी बुलंद आवाज में जब 80 वर्षीय पंडित तिवारी जी बोलते हैं..
आ गया मंदिर
हो जाओ अर्पण
मांगो मुरादें
दौलत देगी
इज्जत देगी
भर लो झोली…
तब वहां खड़े हुए सभी लोग अपने हाथ पसार देते हैं एवं अपने मन मस्तिष्क को माता जी के चरणों में समर्पित कर देते हैं और जोर से बोलते हैं “जय माता दी” माता जी की कृपा एवं भक्तों की आस्था का ऐसा दृश्य देखने के लिए शायद देवता भी नवरात्रि का इंतजार करते होंगे।
क्षेत्र के लोगों की ऐसी मान्यता है पूरे देश में किसी भी धार्मिक स्थल पर जाते हैं अपने श्रद्धा के पुष्प चढ़ाते हैं। भक्ति भाव से पूजा अर्चन भी करते हैं परंतु अपने मन की मनोकामना केवल मंडी में विराजित माताजी के सामने ही प्रकट करते हैं। एवं मंडी वाली मां दुर्गा अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करती। सभी लोगों के साथ मेरा निजी अनुभव भी यही है। माता सचमुच बहुत ही दयालु हैं ।
जय मां दुर्गा🙏🙏
जय मंडी वाली मातारानी 🙏🙏

जयंत शाह

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