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अलौकिक शक्ति प्रदान करती हैं-अंबाजी”

 जयंत शाह

विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन ने अपने“आपक्षिता सिद्धांत” के द्वारा दुनिया को बताया दुनिया में जो है वह “शक्ति” ही है। शक्ति को ना बनाया जा सकता है ना ही उसका नाश किया जा सकता है।हां शक्ति का संचय और सदुपयोग किया जा सकता है। वर्ष भर में दो बार पढ़ने वाली प्रकट नवरात्रि एवं दो बार पढ़ने वाली गुप्त नवरात्रि शक्ति के संचय का ही पर्व है। आज हम चलेंगे उस स्थान पर जहां मातृशक्ति से प्रार्थना करने स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम पहुंचे थे। गुजरात एंव राजस्थान की सीमा से लगा हुआ गब्बर पर्वत जहां स्थित है शक्तिपीठ
“श्री अंबाजी धाम”
यह शक्ति पीठ 51 शक्तिपीठों में अति विशिष्ट पीठ है। इस शक्तिपीठ में माता सती का हृदय अंश गिरा था ।

भगवान स्वयं प्रार्थना करते हैं शक्ति से :

जब भगवान राम जी माता सीता के विरह में
शोक मग्न थे तब उन्होंने अंबाजी धाम आकर माता से प्रार्थना की और मां ने प्रसन्न होकर राम जी को अचुक अस्त्र प्रदान किया जिससे उन्होंने रावण का संहार किया।
द्वापर काल में भगवान श्री कृष्ण का मुंडन संस्कार इसी स्थान पर हुआ था।
अलौकिक सौंदर्य युक्त अंबाजी धाम अरावली पर्वत श्रृंखला के गब्बर पर्वत पर स्थित है।
अंबाजी धाम इसलिए भी विशिष्ट है क्योंकि यहां पर मां की कोई प्रतिमा नहीं बल्कि श्री यंत्र ” की पूजा की जाती है। उसे पुजारी द्वारा इस तरह सजा दिया जाता है दर्शनार्थियों को माता की प्रतिमा ही प्रतीत होती है। वर्ष भर श्रद्धालु यहां दर्शनार्थ आते हैं। विशेषकर भादवी पूर्णिमा के दिन यहां बड़ा मेला लगता है। इस समय पूरे अंबाजी कस्बे को दीपावली की तरह प्रकाश से सजाया जाता है। माना जाता है यह मंदिर लगभग 1200 वर्षों से अधिक प्राचीन है । इस मंदिर का शिखर 103 फीट ऊंचा है और इस पर 358 स्वर्ण कलश स्थापित हैं।यहां अंबाजीधाम से 5 किमी. दूर कोटेश्वर महादेव मंदिर है जहां सरस्वती नदी बहती है मानो लगता है स्वर्ग यही है।
यहां प्रति 3 किलोमीटर पर छोटे-छोटे शक्तिपीठ के प्रतिरूप बनाए गए हैं। इससे इस धाम की प्रदिक्षणा करते हुए यह अनुभव होता है की 51 शक्ति पीठ के दर्शन एक ही जगह पर हो गए।
भव्य – दिव्य – अलौकिक अंबाजी मंदिर पहुंचने में 999 सीढियां हैं । मां का ध्यान करते हुए जयकारा लगाते हुए हर सीढ़ी पर चढ़ते हुए ऐसा ही लगता है हजारों मुरादे ऐसी कि हर मुराद पे दम निकले।
परंतु मां के द्वार पर पहुंचते ही ऐसा लगता है मानो सारी मुराद यहीं पूरी हो गई।

जय मां अंबे🙏
जय जगत जननी🙏

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