धर्मपर्व

अवंतिका धाम हैं मह‍ान सुंदरम , जहां शिव-शक्ति सुंदरम…

धर्म

नवरात्रि विशेष

अवंतिका धाम हैं मह‍ान सुंदरम ,
जहां शिव-शक्ति सुंदरम...

जयंत शाह

भवानी शंकरौ वंदे, श्रद्धा विश्वास रूपीणों।
याभ्यां विना न पश्यंति, सिद्धा स्वान्तः स्थमीश्वरम ।।
अर्थात भगवान शंकर विश्वास स्वरूप है तो माता भवानी श्रद्धा की स्वरूप है।
विश्वास यदि जगाना है तो श्रद्धा की शरण लेना ही पड़ेगी । मां भवानी श्रद्धा स्वरूप है जिससे जड में भी चैतन्यता आ जाती है।

शारदीय नवरात्रि के इन नौ दिवसीय भाव यात्रा के दूसरे दिन आज हम चलेंगे भगवान महाकाल शिव की नगरी अवंतिका अर्थात उज्जैन में |
भारतवर्ष के ह्रदय मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन में जहां एक और भक्तों का विश्वास भगवान महाकाल के रूप में विराजित हैं वहीं दूसरी और भक्तों की श्रद्धा मां हरसिद्धि और मां गढ़कालिका देवी के रूप में विराजमान है |

हरसिद्धि पीठ

हमारी श्रद्धा के पहले पड़ाव के रूप में हम प्रणाम निवेदन करते हैं शिप्रा के पावन तट पर विराजित देवी के चरणों में।
श्री महाकालेश्वर मंदिर से पश्चिम दिशा की ओर स्थित हरसिद्धि शक्तिपीठ जहां माता सती की कोहनी गिरी थी स्थापित है। यहां मां हरसिद्धि अपने अद्भुत स्वरूप में विराजमान है
मंदिर परिसर में लगभग 2000 वर्ष पूर्व बने हुए विशाल दीपस्तंभ हैं। एक बड़ा स्तंभ एवं एक छोटा स्तंभ स्त्री और पुरुष अर्थात शिव और शक्ति के प्रतीक के रूप में स्थापित है।
यही श्रद्धा और विश्वास अनुपम जोड़ा है। दोनों स्तंभों पर 1100 दीप जब एक साथ प्रज्वलित होते हैं पूरा परकोटा रोशनी से जगमगाता उठता है | यह नजारा देखते ही बनता है।
गर्भ ग्रह में देवी हरसिद्धि दिव्य श्री यंत्र पर विराजमान है। यहां मंडप में ऊपर की ओर भी श्री यंत्र बनाया गया है। इस यंत्र के साथ देश के 51 देवियों के चित्र उनके के बीज मंत्र के साथ चित्रित है| देवी हरसिद्धि की प्रतिमा के आसपास महालक्ष्मी और महासरस्वती विराजित है। मंदिर परिसर में ही चिंताहरण गणेश मंदिर एवं हनुमान मंदिर तथा 84 महादेव में से एक कर्केटश्वर महादेव का मंदिर भी स्थापित है।
सम्राट विक्रमादित्य द्वारा गुजरात से लाई गई देवी हरसिद्धि के चरणों में प्रणाम करते हुए हम आगे चलते हैं मां गढ़कालिका के दर्शनार्थ

देवी गढ़ कालिका:

जिस स्थान पर माता सती के ओष्ट गिरे थे उसी स्थान पर मां गढ़कालिका के रूप मे विराजित है।
कालजई महाकवि कालिदास की आराध्य देवी गढ़कालिका का सुंदर मंदिर उज्जैन मैं शक्ति पीठ के रूप में स्थापित है।
कहा जाता है महाकवि कालिदास बचपन में अनपढ़ थे एक दिन जिस पेड़ की डाल पर वह बैठे हुए थे उसी को काट रहे थे उस समय वह लोगों के उपहास का पात्र बने इसके बाद उन्होंने मां काली की उपासना इसी स्थान पर की थी और मां गढ़कालिका पर आस्था रखकर अध्ययन एवं महाकाली की सेवा करते करते महान विद्वान बन गए।
मां गढ़कालिका की सेवा एवं पूजन अर्चन करते करते महाकवि कालिदास के मुख से प्रथम स्रोत
“श्यामला दंडक” यही प्रस्फुटित हुआ ।
आज भी प्रसिद्ध कालिदास समारोह में प्रारंभ में मां काली की आराधना किए जाने की परंपरा है।
आज भी सांय काल के समय
मां गढ़कालिका की आरती का नजारा देखते ही बनता है । उज्जैन में आने वाले श्रद्धालु पर्यटक मां गढ़कालिका की शाम की आरती का इंतजार करते हैं एवं वही रुकते हैं एवं आरती का लाभ तथा आनंद लेकर ही प्रस्थान करते हैं ।
मां गढ़कालिका के चरणों में अपने शब्द रूपी श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए आज की यात्रा को यहीं विराम।
जय शक्ति स्वरूपा
मां हरसिद्धि मां गढ़कालिका 🙏🙏

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Close