साहित्य का सोपान

चप्पल टूट गई…

चप्पल टूट गई

एक थे शशांक लाल, उन्हें एक शादी का न्योता आया, बेचारे कुर्ता पजामा और चमड़े का चप्पल पहन चल दिये शादी अटेंड करने | सड़क की चिप थोड़ी नम थी चप्पल चिपक गई खींचने की कोशिश में टूट भी गई | घर से निकलते ही अपशकुन, उस दिन कोई मोची भी नहीं मिला अब क्या करें दुकान में गए दुकानदार पर सारी खीज निकाल दी, अभी 2 महीने हुए हैं और चप्पल टूट गई, दुकानदार ने रशिद मांगी जो थी नहीं दुकानदार ने कहा जाओ सड़क बनाने वाले मंत्री से लड़ो, चप्पल में कोई दोष नहीं सड़क बनाने वाले ने भ्रष्टाचार मचा रखी है गिट्टी रोड़ा डाला नहीं सिर्फ चिप डाला है | लाल जी बोले वहाँ तो जाऊँगा तुम्हें भी नहीं छोडूंगा |
लाल जी के मन में किसी यह ख्याल आ गया कि देश से चप्पल के बहाने देश जगाया जाये, सो लालजी ने कुछ कारिन्दों की शिकायत ऊपर करदी । फाइलें चलती रही ऊपर से नीचे ,नीचे से ऊपर इस बीच कई और चप्पलें टूट गई लेकिन लाल जी ने ठान रखी थी सारे चप्पलों का हिसाब एक बार लिया जाएगा कुछ सर्कार से कुछ दुकानदार से वसूला जाएगा इस चक्कर में कुछ नेग भी आते जाते रहे और अन्त में उस समस्त काण्ड की जाँच का जिम्मा उनको ही सौंप दिया गया जिनकी शिकायत थी । उन्होंने जो रिपोर्ट भेजी उसमें कहा गया – यह समस्त शिकायत झूठी और काल्पनिक है यहाँ कोई शशांक लाल नाम का आदमी नहीं है । अब लाल जी को अपना होना सिद्ध करना था । बेचारे पटवारी से लगाकर अधिकारी तक गये , पहले तो सबने कहा कल आना । फिर कल-कल करते महीनों बात जाने के बाद , आफिस के गेट पर विराजित दरबान को नेग देने के बाद ही उनको साहब से मुलाकात का सौभाग्य आया । साहब ने बडे प्यार से लाल जी को समझाया -देखो लाल आप सीधे-साधे ईमानदार ,समझदार बाल-बच्चे वाले व्यक्ति है आप कहाँ इस झंझट में पड़ गये ? साहब ने आत्मीयता से कहा – देश की उन्नति के लिए बहुत कुछ गंवाना पड़ता है, आपने चप्पल गंवाई है, कोई सिल्वा कर काम चला लो वर्ना अगर सिद्ध कर भी दिया के तुम जिंदा हो सरकारी काम में दखलंदाजी के एवज में 10 साल की जेल भी दिला देंगे | उस दिन शशांक लाल को समझ आया के उनका चप्पल नहीं टूटा देश की तकदीर फूट गई है ।

शशांक शेखर, पुणे, महाराष्ट्र

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