साहित्य का सोपान

काला सा काला .….कागा

काला सा काला .….कागा

उड़ जा काले कावा तेरे मुंह विच खंड पावा
ले जा तू संदेशा मेरा मैं सदके जावा
बागों में फिर झूले पड़ गए
पक गई मिठिया अंबिया
यह छोटी सी जिंदगी में रात लंबिया लंबिया
घर आजा परदेसी की तेरी मेरी एक जिंदड़ी

रे ! काले कोए , तुझे दुनिया ने कितने नाम दिए कभी कपटी कहा कभी चालाक कभी लोभी कभी धूर्त और फिर तुझसे ही नादान विरह भोगती प्रेमिकाएं अपने पिया का संदेश पूछती हैं ।

हिंदी, राजस्थानी, पंजाबी, हरियाणवी लगभग सभी भाषाओं में कौवे पर बहुत से लोक गीत लिखे जा चुके हैं। जिन्हें वार त्योहार पर अक्सर महिलाओं और पुरषों के द्वारा गाया जाता है । हजारों की संख्या में दिखे जाने वाले कौवे आज लुप्त होने के कगार पर है। कितने मील चले जाने पर बमुश्किल एक कौवा नजर आता है।

कोए स्कैंवेंगर्स प्रजाति से माने जाते है जो मृतक शरीर को अपना भोजन बनाते हैं। यह काला कर्कश बोली बोले जाने वाला कौवा भूटान देश का राष्ट्रीय पक्षी है। कौवे को लेकर बहुत सी किवदंती प्रचलित है जैसे कौवा घर की छत पर बैठकर बोले तो दूर से कोई अतिथि आता है अक्सर बचपन में इस को सच होते भी देखा है। अगर ये घर की चौखट पर बैठकर आवाज देता है तो परदेस गए पिया घर आते है।

कौए के प्रजनन और अंडे को लेकर भी अन्य मान्यताएं हैं
*********************************************
यदि कौवा मादा एक अंडा देती है तो इसे कारूण कहा जाता है इसे अच्छी वर्षा एवं अच्छी पैदावार का संकेत माना जाता है। यदि कौवा एक बार में दो अंडे दे तो इसे अल्प वर्षा की संभावना मानते हैं। अगर तीन अंडे दे वायु कहा जाता है इसे भी शुभ नहीं माना जाता ।यदि चार अंडे दे तो इसे इंद्र कहा जाता है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। किसी भी यात्रा को करने से पहले यदि कव्वे को दही चावल का भोग लगाएं तो यात्रा सफल होती है ऐसी मान्यता हैं । यदि कौआ अपनी चोंच में फल या रोटी या मांस का टुकड़ा दबाए दिखे तो अभीष्ट कार्य में सफलता प्राप्त होती है। यदि कौआ गाय की पीठ पर बैठा हुआ दिखे तो ऐसा देखने वाले को उत्तम भोजन की प्राप्ति होती है। कौवा अनाज के ढेर पर बैठा मिले तो धन में लाभ होता है। यदि सूअर की पीठ पर बैठा हुआ दिखे तो विपुल धन की प्राप्ति होती है। यदि कौवा धूल में लोटपोट होता दिखाई दे तो उस स्थान पर वर्षा अधिक होती है ।
कौए को जहां उपयुक्त लगे वहीं अपना घोंसला बनाकर अंडे दे देती हैं । जैसे खंभे,चट्टान, पेड़ की डाली इत्यादि।अंडे देने के बाद मादा ही अपने अंडों को सेती भी हैं और मादा घोस्ले और बच्चों का ख्याल रखता है । ये एक बार में 5 से 6 अंडे देते और उन्हें 20 से 40 दिनों तक सेते हैं । मादा कौए 3 वर्ष में और नर 6 वर्ष में यौन परिपक्वता प्राप्त कर लेते हैं ।वयस्क कौवे और किशोर कौवे की आंखों के रंग में अंतर होता है । किशोर की आंखे हल्की नीली और वयस्क की हल्की भुरी होती है ।

कौआ पर्यावरण का सैनिक होता है
****************************
कौए को पर्यावरण का सफाई कर्मी भी कहते हैं क्योंकि वह हर प्रकार की गंदगी को खाकर पर्यावरण को साफ करता है। वह मरे हुए जानवर का मांस खाता है।

शारीरिक बनावट
**************
कौए के दो पैर होते हैं और इनके पंजे बहुत मजबूत होते हैं जो पेड़ों की टहनियों को आसानी से पकड़ लेते हैं। कौवे के पंख उसकी उड़ने में सहायता करते हैं। कौआ अक्सर झुंड में पाया जाता है और इसको जब भी खतरा महसूस होता है वह कांव-कांव करने लगता है और ऐसा करके दूसरे कोऔ को खतरे की सूचना देता है।

चोर प्रवृत्ति
**********
इसे चोर पक्षी भी कहते हैं किसी के भी यहां से खाने की चीजें उठा ले जाता है यहां तक कि खाने की थाली से रोटी भी छीन कर ले भागता है ।

कोए के कुछ रोचक तत्व
********************

दुनिया का सबसे छोटा कौआ मेक्सिको में पाया जाता है ।
जो केवल चालीस ग्राम का होता है । दुनिया का सबसे बड़ा कौआ इंडोनेशिया में पाया जाता है जिसकी लंबाई 65 सेंटीमीटर और वजन 1.5 किलो तक हैं ।

कौए भी मर्यादा में रहते हैं
**********************
नर एवम मादा कौए एक दूसरे के प्रति वफादार रहते हैं । नर कौआ संभोग के उपरांत प्रजनन के समय तक मादा कौए की रक्षा करता है ।
नर एवम मादा कौए मिलकर अपने बच्चों को पालते हैं। कौए का निवास स्थान पेड़ होते हैं।
एक रोचक बात यह है कि जब कौआ अपने अंडे को सेता हैं तब कोयल अपने अंडे उनमें मिला देती हैं। कोयल और कौए के अंडे एक जैसे दिखते हैं इसलिए कौआ उनको नहीं पहचान पाता । इस तरह कोयल कौए को मूर्ख बना देती है।

कौए का जीवन काल
********************
कौए की औसत उम्र 10 वर्ष से अधिक होती है।

कौए बुद्धिमान होते हैं
******************
कौए की बुद्धिमता पर एक प्रसिद्ध कहानी है जिसमें एक प्यासा कौवा मटके के अंदर कंकड़ डालकर पानी को मटके के धरातल से ऊपर ले आता है और अपनी प्यास बुझा लेता है।
कौओं को अक्सर बुनियादी उपकरणों का उपयोग करते हुए देखा गया है जैसे जापान में कुछ कौए मूंगफली तोड़ने फोड़ने के लिए सड़क किनारे खड़ी कारों का इस्तेमाल करते हैं कई बार भोजन तक पहुंचने के लिए कौओं को छड़ियों का इस्तेमाल करते हुए भी देखा गया है। सिखाए जाने पर 1 से 8 तक गिन सकते हैं। पालतू काला कौवा तोते से बेहतर बात कर सकते हैं। कुछ कौए 50 से ज्यादा शब्द सीख जाते हैं। इजराइल में जंगली कव्वे ब्रेड के चूरे को चारे के रूप में इस्तेमाल कर मछली पकड़ते हैं।कौवे अक्सर चीटियों को अपने पंखों से रगड़ते हैं या चींटी के बिल के पास लेट जाते हैं ताकि चीटियां उनके पंखों में आ जाए। यह अभी तक अज्ञात है कि वह वास्तव में ऐसा क्यों करते हैं कुछ का मानना है कि चींटी कौए के पंखों में पाए जाने वाले जीवो को खाकर उन्हें कीटाणु मुक्त करती है । कौए अंडे चोर भी होते हैं जो दूसरे पक्षियों के घोंसले में से उनके अंडे चुरा कर खा जाते हैं ।

कौए की प्रजाति
*************
कौवा कॉर्विड्स परिवार का सदस्य हैं। जिसमे कौए के अलावा रवेंस, रुक्स, जैएस, जैकड़ाॅज, मैगपाईज शाम।

रूपल उपाध्याय, बड़ोदरा, गुजरात

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Close