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दया के सागर का दसवें दिन सीहोर में विराम,

धर्म

दया के सागर का दसवें दिन सीहोर में विराम,♦
गणपति बप्पा मोरिया ,
अगले बरस फिर लिखने की क्षमता दे…

जयंत शाह, सीहोर

प्रथम पूज्य भगवान गणपति की 10 दिवसीय कृपा यात्रा में आज दसवें दिन, हमारी गणेश भाव यात्रा को विराम देंगे ,मेरे पूज्य गुरुदेव के सानिध्य में।

सीहोर तहसील के ग्राम बिजोरी स्थित सीताराम आश्रम “गौतीर्थ ”
गौशाला प्रमुख नरेश तिवारी द्वारा गौ माता की कृपा एवं उनके गुरु देव की कृपा से उनके स्वयं के अनुभव गम्य ज्ञान से हम सभी आज लाभान्वित होंगे ।

बिन गरु ज्ञान कहाँ से लाऊं

हमारे जीवन में भी गणेश जी की कृपा गुरुदेव के माध्यम से प्राप्त हो। हमारे जीवन में सुख, संपत्ति, मानसिक शांति मिले इसी आशा और विश्वास के साथ चलते हैं गौ माता और गुरुदेव के सानिध्य में
गुरुदेव ने बताया
सत्य सनातन धर्म
की आधारशिला है पंच देव पूजन ।पंचदेव अर्थात
गणपति,
सूर्य,
विष्णु
शिव एवं दुर्गा
इनमें भी गणपति को प्रथम बताया गया है।

साधक के जीवन में
प्राण- गणपति
ऊर्जा- गणपति
धन – गणपति
विद्या- गणपति
आध्यात्मिक जीवन का तो सार ही गणपति हैं।
बिन गजानन सब सून।
आलग-आलग मनोकामनाओं की पूर्ति के लिये अलग आलग द्रव्य से निर्मित गणपति की प्रतिमा स्थापित करने का विधान है।
1, श्री गणेंश : मिट्टी से पार्थिव श्री गणेश प्रतिमा बनाकर पूजन करने से सर्व कार्य सिद्ध होते हैं।

2 , हेरम्ब गणेंश :गुड से गणेंश जी बनाकर पूजन करने से लक्ष्मी प्राप्ति होती है।
3,वाक्पति :भोजपत्र पर केसर से श्री गंणेश जी कि चित्र बनाकर पूजन करने से विद्या की प्राप्ति होती है।
4,उच्छिष्ट गणेश: लाख के श्री गणेश बनाकर पूजन करने से स्त्री सुख और स्त्री को पति प्राप्त होता है गृह क्लेश का निवारण होता है।
5, गोबर गणेश: गौ माता के गोबर से श्री गणेश की मूर्ति बनाकर पूजन करने से पशुधन में वृद्धि होती है और पशुओं की बीमारी नष्ट होती है।
6,श्वेतार्क गणेश : सफेद आक (मंदार) की जड के श्री गणेश बनाकर पूजन करने से भूमि व भवन का लाभ होता है।
7, शत्रुंजय कड़वे नीम की लकड़ी से श्री गणेश जी बनाकर पूजन करने से शत्रु का नाश होता है। एवं युद्ध में विजय मिलती है।
8, हरिद्रा गणेश: हल्दी की जड़ से या आटे में हल्दी मिलाकर गणेश प्रतिमा बनाकर पूजन करने से विवाह में आने वाली बाधा नष्ट होती है
9,संतान गणेश : मक्खन के श्री गणेश बनाकर पूजन से संतान की प्राप्ति के योग निर्मित होते हैं।
10,धान्यगणेश : सप्तधान्य को पीसकर उनके
श्री गणेश बनाकरर आराधना करने से धान्य वृद्धि होती है।
मां अन्नपूर्णा प्रसन्न होती है।
11,महागंणेश : लाल चंदन की लकड़ी से 10 भुजा वाले श्री गणेश जी की प्रतिमा निर्माण कर पूजन करने से राजराजेश्वरी
श्रीआद्दयाकालिका की शरणागति प्राप्त होती है।
पूज्य गुरुदेव के खजाने से कुछ मोती।
पूज्य गुरुदेव , भगवान गणेश, गौ माता ,
गंगा मैया, श्री गायत्री एवं गीता मैया की कृपा हम सब पर बनी रहे।

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