साहित्य का सोपान

ओज़ोन परत को बचाना होगा…

भोपाल,एमपी मीडिया पॉइंट

ओजोन परत का पर्यावरण और मानव सभ्यता से ही नहीं बल्कि पृथ्वी पर विचरण कर रहे समस्त जीव जंतु से गहरा नाता है. इसमें आने वाले बदलाव का असर पूरी धरती पर देखने को मिलता है. यह बात युवा कम्यूनिकेटर आशी चौहान ने ओज़ोन दिवसके मौके पर बच्चो से कही।आशी चौहान ने बताया कि ओजोन परत धरती से 10 किलोमीटर से 50 किलोमीटर की ऊंचाई के बीच पाई जाती है। ओजोन परत यानि पृथ्वी और पर्यावरण के लिए एक सुरक्षा कवच, यह कवच पृथ्वी और पर्यावरण को सूर्य की खतरनाक पराबैंगनी (अल्ट्रा वायलेट) किरणों से बचाती है. लेकिन हम मनुष्य ने भौतिक सुख के लिए इस सुरक्षा कवच में भी छेद कर डाला है, जो सूरज की खतरनाक किरणों से हमें अब तक बचाती रही है. चिंता की बात यह कि अब यह छेद सिर्फ छेद नहीं, मानव अस्तित्व के लिए अंतहीन सुरंग बनने की ओर बढ़ता जा रहा है ओजोन दिवस पर ग्रामीण क्षेत्र मे आशी ने पर्यावरण संरक्षण प्रदर्शनी लगाई और समझाया कि ओज़ोन परत हमारे लिए छतरी का काम करती है। जिस प्रकार छतरी बारिश में हमें पानी में गीले होने से बचाती है। उसी तरह ओजोन परत भी हमें सूरज की हानिकारक किरणों सोख लेती है। साथ ही उसे फिल्टर करके हमारे पास भेज देती है।
पोस्टर प्रदर्शनी में आशी ने बताया कि घर में लगे पौधे न केवल घर का वातावरण अच्छा बनाए रखते है बल्कि घर को खूबसूरत लुक भी देते हैं। कहते है कि रात के समय अधिकतर पौधे कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ते है, जो हमारी सेहत को नुसकान पहुंचाते है। इसी डर की वजह से लोग अपने घर में पौधो को लगाने के बजाएं, घर के बाहर उन्हें लगाना पसंद करते है लेकिन कुछ पौधे ऐसे भी है, जो रात को कार्बनडाई ऑक्साइड के बजाए ऑक्सीजन विसर्जित करते हैं। ऑक्सीजन हमारी सेहत के साथ-साथ घर का वातावरण भी अच्छा बनाएं रखती है। इससे न केवल हमे शुद्ध हवा मिलती है। एलोबेरा, नागफनी, नीम, क्रिसमस ट्री और ऐरेका प्लम जैसे पौधे रात में भी ऑक्सिजन छोड़ते हैं। जिस पेड़ की पत्तियों का एरिया ज्यादा बड़ा होता है वह अधिक ऑक्सिजन छोड़ता है। इसमें पीपल का पेड़ शामिल है।

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