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शहर -ए-गंणेश , गणेश शरणं गच्छामि…

जयंत शाह,सीहोर

यहां बचाते हैं बुरी शक्तियों से अपने भक्तों को गजानन

गणपति शरणं गच्छामि अर्थात जब बौद्ध धर्म के अनुयाई गजानन में भी बुद्ध को आत्मसात कर ले ।
आप सब लोग एमपी मीडिया पॉइंट के माध्यम से भगवान गणेश की ओर भाव यात्रा मैं अब तक 8 दिनों से मुसाफिर की तरह मेरे साथ है जिसका मुझे अत्यंत उल्लास है। इसी उल्लास में अत्यंत रस मिलाने के लिए खीर मे मिश्री की मात्रा बढ़ाने के समान हम फिर से अपनी यात्रा में एक लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते हुए थाईलैंड के चाचोइंगशाओ ख्लांन्ग ख्वेन शहर मे स्थित पार्क मे अपनी यात्रा को अल्पविराम देंगे ।
दुनिया मे कई तरह के पार्क हमने देखे हैं पर थाईलैंड के इस शहर में यह एक ऐसा पार्क है जिसकी कल्पना अपने आप में एक अद्भुत एहसास है।
इस विश्व प्रसिद्ध पार्क का नाम है।ख्लांग ख्वेन गणेंश इंटरनेशनल पार्क।

चौकाने वाला तथ्य यह है कि थाईलैंड में हिंदू से अधिक गैर हिंदू लोग भगवान गणेश को मानते हैं। केवल गणेश महोत्सव में ही नहीं बल्कि समृद्धि के देवता एवं बुरी शक्तियों से बचाने वाले रक्षक के रूप में वर्ष भर भगवान गणेश की
पूजा -उपासना करते हैं।
और पूजा करने वालों में अधिक संख्या गैर हिंदू लोगों की रहती है।

यहीं है विश्व की सबसे ऊंची गणेश प्रतिमा।

थाईलैंड के गणेश इंटरनेशनल पार्क में
गणेशजी की तीन
चिताकर्षक एवं विशाल मूर्तियां यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।
पहेली है दुनिया की सबसे विशाल मूर्ति जोकि 39 मीटर याने 120 फिट ऊंची है।
जिसे कांसे के 854 अलग-अलग हिस्सों से
मिलाकर बनाया गया है। मूर्ति के सिर पर विराजित कमल का फूल ऐसा लगता है मानो महालक्ष्मी स्वयं गजानन के माध्यम से भक्तों को आशीर्वाद प्रदान कर रही है। और कमल के फूल के बीच बना ” ऊं ” शांति का संदेश देता हुआ प्रतीत होता है।

दूसरी मूर्ति आशीर्वाद की मुद्रा में बेठी हुई है।
जो भक्तों पर अनवरत अपना आशीर्वाद बरसा रही है।

तीसरी मूर्ति अर्धलेटी अवस्था में आने वाले भक्तों का मन मोह लेती है।
इसके अलावा इस पार्क में गजानन के माता पिता के रूप में भगवान शिव एवं पार्वती की आकर्षक मूर्ति स्थापित है।
इस गणेश इंटरनेशनल पार्क का काम सन 2008 से प्रारंभ होकर 2012 में संपन्न हुआ।
पड़ोसी राष्ट्र थाईलैंड की इस अद्भुत यात्रा को अल्पविराम देते हुए ऐसा लगता है मानो यहीं ठहर जाएं और गजानंद को निहारते रहें।

जय रिद्धि-सिद्धि के दाता गजानन महाराज

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