साहित्य का सोपान

इच्छाशक्ति…

इच्छाशक्ति

तूफान के निष्ठुर प्रहार से
जर्जर नौका हो गयी,
निराश हो नाविक चला गया,
अब रोजी रोटी का क्या होगा।

पास पडे बंजर में टूटी डाली टूटे पौधे,
जब थमा तूफान शान से उठ खडे हुये।
जडें तो थीं ना?फिर डर कैसा
पनप गये और फूल गये।

सीखो नाविक इन पेडों से
कभी तो तूफान थमेगा,
हिम्मत मत हारो धैर्य रखो।
फिर खडी करो अपनीं नौका,
इस प्राकृतिक आपदा से डरो नही।

थमा तूफान पथिक आ गये,
नाविक की नौका चमक रही।
यह प्रकृति हमें सिखा रही ,
इच्छाशक्ति यदि हो तो कभी हार नहीं होती

डा.चंद्रकान्ता वर्मा
लखनऊ, उप्र

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