सीहोर

नदी पार कर स्कूल जाते हैं बच्चे,तेज बारिश होने पर नहीं पहुंचते स्कूल…

नफीस खान
नादान,एमपी मीडिया पॉइंट

विकास से कोसो दूर हैं यहां गांव,बीमार होने पर मरीजों एवं गर्भवती महिलाओं को डोली खटोली से ले जाने को मजबूत हैं, ग्रामीण ग्रामीणों की मजबूरी, जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार हैं यहां ग्रामीण।

नदी पार कर स्कूल जाते हैं बच्चे, तेज बारिश होने पर नहीं पहुंचते स्कूल

सीहोर जिले के इछावर तहसील मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर आदिवासी अंचल में कई गांव ऐसे हैं जो आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। हम बात कर रहे हैं, बालूपाठ,मगर पाठ, धाइखेड़ा,कालियादेव,आदि गांव में स्कूल न होने से यहां के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा तक के लिए दूसरे गांव में जाना पड़ता है। वहीं शिप नदी में पुल न होने से स्कूल जाने के लिए नदी के गहरे पानी में उतरकर स्कूल जाने को नौनिहाल मजबूर हैंं। बारिश के मौसम में इन नौनिहालों को स्कूल जाने मेें खासी परेशानी होती है। वहीं गांव के किसी व्यक्ति के गंभीर बीमार होने पर व गर्भवती महिलाओं को प्रसव कराने के लिए डोली-खटोली के सहारे अस्पताल तक ले जाना पड़ता है।

जान जोखिम में डालकर बुजुर्ग महिला कर रही है,नदी पार

यहां गांव आदिवासी विभाग के अंतर्गत आते हैं। आदिवासी विकास विभाग इन गांवों में मूलभूत सुविधाओं से आज भी ग्रामीण वंचित हैं। ग्रामीणों ने एमपी मीडिया पॉइंट से चर्चा के दौरान आरोप लगाया कि आजादी के 7 दसक बाद भी हम मूूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। शिप नदी के पुल सहित अन्य समस्याओं से कई बार जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया लेकिन कोई हल नहीं निकला। ग्रामीणों के द्वारा बताया कि हमारे गांव के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए दो से तीन किमी तक अलीपुर,कलियादेव सड़क में पैदल चलकर बिना पुल के नदी पार करके जाना पड़ता है, वहीं कुछ बच्चे माध्यमिक शिक्षा के लिए अलीपुर जाते हैं। कई बार छात्रों को बारिश के मौसम में नदी का जल स्तर बढऩें के कारण बिना स्कूल गए ही वापस घर लौटना पड़ता है।

गर्वभती महिलाओं को प्रसव के लिए डोली-खटोली का लेना पडता है सहारा

बताया गया कि आदिवासी महिलाओं के डिलेवरी के समय इस कीचड़ युक्त सड़क एवं नदी पार करना कितना जटिल होता होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। ग्रामीणों के द्वारा आरोप लगाया गया कि ऐसी स्थिति मे लोगों के द्वारा लकड़ी की डोली खटोली बनाकर कीचडय़ुक्त सड़क व नदी पार करना पड़ता है। ग्रामीणों के द्वारा बताया गया कि ये गांव जंगल के में स्थित हैं। इसके वजह से मौसमी बीमारियों का प्रकोप अत्यधिक रहता है। यहां तक कि जिनके यहां डोली खटोली से पहुंचाने से लोगों की कमी होती है। वो उपचार के लिए हास्पिटल तक नहीं पहुंच पाते और घुट-घुट के दम तोड़ देते हैं। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों पर लगाया वादा खिलाफि का आरोप-ग्रामीणों नें आरोप लगाया कि सांसद, विधायक,एवं जिला पंचायत तक इस समस्या के बारे में अवगत कराया गया था एवं बीच-बीच में टेलीफोन एवं मिलकर कई बार अपील किया गया।लेकिन कोई हल नहीं निकला। जनप्रतिनिधि वायदा तो करते हैं। लेकिन वायदा पूरा नहीं करते, जिसका नतीजा यह है कि आज भी आदिवासी अंचल के ये ग्राम मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

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