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देश विदेश से महिलाएं भेजती हैं राखियां अपने भाई”बड़ा गणपति” को,

गहरी आस्था है श्रदालुओं की,होती है मनोकामना पूरी

जयंत शाह,सीहोर

मैं जिक्र कर रहा हूँ जिंतामन गणेश की धरती सिद्धपुर से कि प्राचीन अवंतिका नगरी महाकाल राजा की राजधानी उज्जैन नगर में महाकाल मंदिर के निकट स्थित गणेश मंदिर में प्रतिष्ठित बड़ा गणपति मंदिर स्थित है। यहां प्रतिष्ठित प्रतिमा भक्तों को बरबस ही अपनी और आकर्षित करती है।

प्रसंगवश आज हम चलते हैं अपनी भाव यात्रा के माध्यम से “बड़ा गणपति” मंदिर उज्जैन।

यहां प्रतिष्ठित गजानन की प्रतिमा विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमाओं में से एक है। मूर्ति के चरणों से लेकर मुकुट तक की ऊंचाई 25 फीट एवं चौड़ाई 16 फीट है।
प्रतिमा के मस्तक पर त्रिशूल और स्वास्तिक बना हुआ है। दाहिनी और घूमी हुई सूंड में एक लड्डू दबा हुआ है।
भगवान गणेश के गले में पुष्पों की माला है।
चार भुजा धारी गजानन के दोनों ऊपरी हाथ जप मुद्रा में है।नीचे के दांय हाथ मे माला व बायं हाथ में लड्डू की थाल है।

सीमेंट का उपयोग नहीं

आज से लगभग 115 वर्ष पहले प्रतिष्ठित इस मूर्ति की विशेषता यह है कि , इस प्रतिमा में सीमेंट का उपयोग नहीं किया गया अपितु गुड़ एवं मैथीदाने के साथ चूने,बालू ,और रेत का प्रयोग किया गया।

पवित्र नदियों का जल एवं सप्त पुरियों की मिट्टी शामिल

इस प्रतिमा को बनाने में जहां एक और सभी पवित्र नदियों के जल का प्रयोग किया है वहीं दूसरी ओर मथुरा, द्वारिका, काशी ,अयोध्या उज्जैन, कांची एवं हरिद्वार इन सातों ही मोक्ष पुरियों की मिट्टी को शामिल कर बड़ा गणपति की प्रतिमा को बनाया गया।

बनाने में लगभग ढाई वर्ष लगे।

इस मंदिर की स्थापना स्वर्गीय ज्योतिषाचार्य पंडित नारायण जी व्यास ने की थी।

मुख्य विशेषता

बड़ा गणपति मंदिर विराजित भगवान गजानंद को देश-विदेश से महिलाएं रक्षाबंधन के दिन राखी प्रेषित करती हैं
प्रत्येक वर्ष इंदौर, मुंबई, लखनऊ और अन्य शहरों तथा अमेरिका, सिंगापुर, दुबई सहित और भी देशों से महिलाएं गजानन को अपना भाई मान कर राखियां प्रेषित करती हैं। जिन्हें पुजारी द्वारा विधिवत उन राखियों को गजानंद को पहनाया जाता है।

अवंतिका में विराजित बड़ा गणपति की कृपा सभी पर बनी रहे ऐसी प्रार्थना के साथ गणपति बप्पा की जय।

जयंत शाह, सीहोर

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