धर्म

जहां सपरिवार विराजमान हैं गजानन, रणथम्भौर (राजस्थान)

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जहां सपरिवार विराजमान हैं गजानन, रणथम्भौर (राजस्थान)

जयंत शाह, सीहोर

10 दिवसीय गणेश महोत्सव में एमपी मीडिया पॉइंट का यह प्रयास है कि भगवान गणेश की पूजा अर्चना शब्दों द्वारा अपने भाव पुष्प समर्पित करें |
इसी कड़ी में हम अपनी भाव यात्रा में मैं आज चलेंगे एक ऐसी जगह पर जिससे आप सब परिचित तो है परंतु आपके जीवन में उसका गहरा लगाव एवं प्रासंगिकता है।
यह स्थान इस इसलिए तो विशेष है ही क्योंकि यह भारतवर्ष में स्थित चार स्वयंभू गणेश मंदिर में प्रथम गणेश मंदिर है।
यहां भगवान त्रिनेत्र हैं तीसरा नेत्र ज्ञान का प्रतीक है। ऊंचे दुर्ग पर विराजित इस मंदिर की प्राकृतिक छटा देखते ही बनती है। यहीं पर कल कल कलोलवतीं बहते झरने का स्वर अरावली पर्वत से बहता हुआ वहां रहे हुए टाइगर रिजर्व क्षेत्र के शेरों के समूह में मिल जाता है।
इस स्थान का महत्व इसलिए सबसे अधिक है क्योंकि यह भक्त का ईश्वर से मानवीय संबंध बनाता हुआ अनोखा मंदिर है।
जिस प्रकार हम अपने स्नेही जन को अपना हाल बताते हुये या उसे हमारे घर होने वाले शुभ अवसर पर निमंत्रण देते हैं। उसी प्रकार रणथंभोर मे
यहां विराजित गणेश जी को भी हम अपने मन का हाल लिखकर बता देते हैं।

अनूठी परंपरा

रणथंबोर दुर्ग स्थित प्राचीन स्वयंभू गणेश मंदिर मैं ऐसी परंपरा है कि जहां लोग घर में शुभ कार्य होने पर या कोई समस्या होने पर अपने मन की बात पत्र में लिखकर गणेश जी को पहुंचाते है। पुजारी स्वयं वह पत्र भगवान गणेश को सुनाते हैं।
हैरान करने वाली बात यह है कि आपको पत्र में एड्रेस के स्थान पर सिर्फ भगवान गणेश रणथंबोर ,
सवाई माधोपुर, राजस्थान लिखना होता है। डाकिया स्वयं चिट्ठी वहां पहुंचा देता है। ऐसी मान्यता है की पत्र भगवान गणेश के चरणों में पहुंचते ही गणेश जी तुरंत द्रवित होकर भक्तों की समस्या का निराकरण करते हैं।

विशेष बात:

भगवान गणेश यहां अपने परिवार के साथ विराजमान है।
गणेश जी के साथ उनकी दोनों पत्नी रिद्धि एवं सिद्धि तथा दोनों पुत्र शुभ और लाभ भी विराजमान है।

पार्वती नंदन भगवान गणेश एवं रिद्धि – सिद्धि की कृपा हम सभी भारत वासियों पर बनी रहे एवं शुभ -लाभ का वास घर घर में हो ऐसी प्रार्थना एवं शुभकामनाएं ।

 

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