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चिंता काहे की जब साथ हैं सीहोर के चिंतामन गणेश – जयंत शाह

प्रसंगवश विशेष
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चिंता काहे की जब साथ हैं सीहोर के चिंतामन गणेश

जयंत शाह, सीहोर

10 सितंबर 2021 भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि.
आज घर -घर बिराजेगें प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता,

गणेश चतुर्थी से प्रारंभ होकर 19 सितंबर अनंत चतुर्दशी तक चलने चलने वाले 10 दिवसीय गणेश महोत्सव संपूर्ण भारतवर्ष में श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा।
भगवान गणेश सभी देवों में प्रथम पूज्य है।

भारत के जनमानस में व्याप्त राम चरित्र मानस का लेखन गोस्वामी बाबा तुलसीदास ने जब प्रारंभ किया तो सर्वप्रथम श्लोक गणेश वंदना से प्रारंभ किया।
राम चरित्र मानस का प्रथम श्लोक है.

“वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि।
मंगलानं च कर्तारौ वन्दे वांणी विनायकौ।।””

और चौपाई का प्रारंभ भी गणेश वंदना से ही किया ।
मानस की प्रथम चौपाई है
“”जो सुमिरत सिधि होइ गन नयक करिवर बदन।
करउ अनुग्रह सोइ बुद्धि रासि सुभ गुन सदन ।

भगवान गणेंश के प्रथम पूज्य के संबंध में पौराणिक कथा :

ब्रह्मा जी ने जब यह निर्णय लेने का विचार किया की देवताओं में प्रथम पूज्य कौन हो तब यह तय किया गया जो पृथ्वी की प्रदक्षिणा सबसे पहले कर कर आएगा वही सबसे प्रथम पूज्य माना जाएगा।
मूषक वाहनधारी गणेश जी ने अपने माता पिता भगवान शंकर एवं पार्वती जी की प्रदक्षिणां की।

“चरणं मात-पितु के धर लिन्हे तिनके सात प्रददक्षिणां किन्हे”
धनि गणेश कही शिव हिय हर्षयो ,
नभ ते सुरण-सुमन बहु बरस्यो ।”

यानी माता-पिता को उन्होंने समूचा लोक माना और उनकी सात प्रतिक्षणा कर ली।शिवजी का हृदय यह देखकर गदगद हो गया और आकाश से पुष्प वर्षा होने लगी।
विदित हे गणेंशजी सभी देवताओं से सबसे पहले पहुंचे। उनका यह बुद्धि कौतुक देखकर भगवान ब्रह्मा ने उन्हें प्रथम पूज्य बनाया । अतः प्रत्येक कार्य के प्रारंभ में प्रथम भगवान गणेश की पूजा होती है।पंच देवोपासना में भगवान गंणपति मुख्य हैं ।
प्रत्येक कार्य का प्रारंभ “श्री गणेश” अर्थात उनके स्मरण वंदन से ही होता है।
भगवान गणेश बुद्धि के अधिष्ठाता है भगवान गणेश का ध्यान एवं उनके पवित्र नाम जप व उनकी आराधना वाक् शक्ति और स्मरण शक्ति को तीव्र बनाती है। भगवान वेदव्यास द्वारा रचित
आदि ग्रंथ महाभारत का लेखन कार्य भी भगवान गणेश ने ही किया। जिसे हम पंचम वेद भी कहते हैं।भगवान गणेश के रूप का चिंतन कर हम जीवन के प्रबंधन की योजना बना सकते हैं।

बडा सिर: यानी जीवन मे बडी सोच रखने वाले लोग सफल होते हैं।

बडे कान : बोलने से अधिक सुनना एवं सचेत रहना सफलता का द्वार है।
छोटी आंख : तेज नजर यानी अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्रता एवं पैनी दृष्टि ।

एक दंत : अर्थात लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखना सफलता की कुंजी है।

बडा पेट : बडाई एवं निंदा दोनो को आत्मसात करना एवं सफलता को पचा लेना .
जिससे सफलता चिरस्थाई हो।

आशा है हम यह गणेश उत्सव श्रद्धा के एवं उमंग के साथ तो मनाएंगे ही साथ में विनायक विघ्नहर्ता प्रथम पूज्य के जीवन चरित्र से सीख भी प्राप्त करेंगे।
सभी को गणेश चतुर्थी के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई।
मंगल मूर्ति सबका मंगल करें ऐसी प्रार्थना।

जयदेव जयदेव जय मंगलमूर्ती दर्शन मात्रे मनोकामना पूर्ती,
जयदेव जयदेव।।

जयंत शाह, सीहोर (मध्यप्रदेश)

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