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सीहोर में हैं निशानियां शूरवीर दुर्गादास राठौड़ की

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सीहोर में हैं निशानियां शूरवीर दुर्गादास राठौड़ की,
मां दुर्गा के आशीर्वाद तले वीरता के बेमिसाल इस व्यक्तित्व को प्रणाम

जयंत शाह

13 अगस्त 2021
आज वीर शिरोमणि दुर्गादास की 383 वीं जयंती है .
वीर शिरोमणि दुर्गादास का जन्म जोधपुर के एक छोटे से गांव सांवला कलां मे आसकरणजी राठौड के घर वीरजाया माता नेतकंवर की कुक्षी से 13 अगस्त सन् 1638 ( श्रावण शुक्ला चतुर्दशी सवंत 1695 ) को हुआ .।
आज के दिन मारवाड़ सहित संपूर्ण भारतवर्ष में वीर दुर्गादास की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है ।
सीहोर में भी प्रतिवर्ष वीर दुर्गादास जयंती शानदार आयोजन एवं भव्य चल समारोह के साथ मनाए जाने की परंपरा है।
परंतु पिछले वर्ष एवं इस वर्ष वैश्विक महामारी कोरोना के चलते राठौर क्षत्रिय महासभा द्वारा चल समारोह का आयोजन नहीं करते हुए राठौर मंदिर गंज में पूजन अर्चन के साथ राठौर धर्मशाला गंज में झंडा वंदन एवं वीर दुर्गादास पार्क में वीर दुर्गादास राठौर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ संक्षिप्त गरिमामय समारोह के साथ करने का निर्णय लिया गया ।
वीर दुर्गादास के जीवन चरित्र को मुंशी प्रेमचंद्र द्वारा लिखित पुस्तक से उद्धृत इस पैराग्राफ से जाना जा सकता है
“राजपूताना में बड़े-बड़े शूरवीर हो गए उस मरूभूमि ने कितने ही नर रत्नों को जन्म दिया है। परंतु वीर दुर्गादास अपने अनुपम आत्म त्याग ,अपनी निस्वार्थ स्वामी भक्ति और अपने उज्जवल चरित्र के लिए कोहिनूर के समान है। औरों में शौर्य के साथ कहीं ना कहीं हिंसा और द्वेष भी पाया जाएगा , कीर्ति का मोह भी होगा , अभिमान भी होगा पर दुर्गादास शूर होकर भी साधु पुरुष थे।”
आज भी मारवाड़ के गांव में बड़े -बूढ़े लोग बहू -बेटी को आशीर्वाद स्वरुप दो शब्द कहते हैं और वीर दुर्गादास को याद करते हैं ।
” माई ऐहा पूत जण जेहा दुर्गादास बांध मरुधरा राखियो बिन खंभा आकाश “
अपने अंतिम समय में वीर दुर्गादास भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में रहे एवं 81 वर्ष की आयु में पवित्र शिप्रा के किनारे 22 नवंबर 1718 के दिन देह त्याग किया ।जोधपुर के शासकों द्वारा चक्रतीर्थ उज्जैन पर वीर शिरोमणि दुर्गादास की याद में छतरी का निर्माण कराया गया ।

वीर शिरोमणि दुर्गादास कहीं के राजा- महाराजा नहीं थे परंतु उनके चरित्र की महानता इतनी ऊंची उठ गई थी कि वह अनेक पृथ्वीपालों , राजा महाराजाओं और सम्राटों से भी ऊंचे हो गए । उन का यश तो स्वयं उनसे भी ऊंचा होकर अजर अमर गाथा बन गया । वीर दुर्गादास के चरणों में सादर नमन, प्रणाम और कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से पुण्य स्मरण

जयंत शाह , सीहोर

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