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पूरे शबाब पर पहुंचा सीहोर-इछावर का मिनी पचमढ़ी

...हादसे रुकना चाहिए।

पूरे शबाब पर पहुंचा सीहोर-इछावर का मिनी पचमढ़ी

मगर हादसे तो रुकना चाहिए।

राजेश शर्मा

उपेक्षा के बावजूद सीहोर जिले मे मौजूद मिनी पचमढ़ी कहा जाने वाला पर्यटक स्थल””कालियादेव”” इस समय पूरे शबाब पर है। जहाँ पहुँचने वालों से मानो प्रकृति खुद बातें करने लगती है। यहाँ के झरने जहाँ मधुरगान के साँथ लोगों को संग-संग गुनगुनाने के लिये मजबूर कर देते है वहीं इठलाती सीप नदी कह रही है “गाए जा गीत मिलन के….तू अपनी लगन के’ सजन घर जाना है …”

ऊँघते अनमने सघन जंगल में पहाड़ियों के ऊपर देवताओं की चमत्कारिक मूर्तियां जैसे मन्नतें पूर्ण करने को खुद आवाज़ देती हों।
कालिया देव का वह चमत्कारिक कुन्ड जिसका छैव (गहराई) को अबतक सात खाट की रस्सी से भी नहीं ढूंढा जा सका, वह आज भी श्रद्धालुओं से नित्य सत्संग करता दिखाई देता है । पितृमोक्ष अमावस्या की रात तांत्रिक विद्या का जागृत केन्द्र प्रदेश में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। यहाँ पहुंचने वाले सैलानियों द्वारा बिताया एक दिन उन्हें हमेशा स्वप्निल नज़र आता है।झरने से सटी अलीपुर की पहाड़ियाँ उन्हें लौटकर आने का संदेश नित्य ही भेजती रहती हों।

लेकिन “”कालियादेव”” स्थल नहीं दिखाई देता और पहाड़ों की आवाज़ नहीं सुनाई देती तो सिर्फ़ सरकार को_____

क्योंकि इछावर के जनप्रतिनधियों ने सरकार के सामने इसकी खूबसूरती और पर्यटन की संभानाओं को कायदे से रखा ही नहीं ,
यही वजह रही कि सीहोर जिले के इस मिनी पचमढ़ी को अब तक भी संजोए रखने में पर्यटन विभाग लाचार एवं असफल दिखाई दे रहा है ।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि शासन की लापरवाही के कारण सघन जंगलों का दायरा लगातार सिकुड़ता जा रहा है। जंगल खेत मे दबदील होते जा रहे है,सीप नदी भी प्रदुषण का शिकार हो जाए तो कोई ताज्जुब नहीं होना चाहिए । विंध्याचल पर्वत श्रेणी को पैगाम देतीं यहाँ की पहाड़ियाँ समतल होने की दिशा मे मुड़ने की विशिल बजाने जा पहुंची हैं ।
अपनी प्राकृतिक सौन्दर्य के बूते पर मिनी पचमढ़ी के नाम से जाना जाता यह मनमोहक स्थल सीहोर जिले के इछावर से 25 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व दिशा मे मौजूद है और वर्तमान मे भोपाल ,इंदौर ,होशंगाबाद ,सीहोर ,आष्टा ,इछावर आदि नगरों से सैकड़ों सैलानी प्रतिदिन पहुंच रहे हैं । 20 फीट चौड़ा झरना करीब 40 फीट की ऊँचाई से गिरता है एेसे मे लोगों के सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से पुख्ता इंतजामात समय की मांग है। पिछले दो वर्षों में हुए हादसों के दौरान करीब आधा दर्जन व्यक्ति सीप नदी की भेंट चढ़ चुके हैं लेकिन मजाल कि शासन ध्यान दे।

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