साहित्य का सोपान

खौफ

⊃खौफ

सीमा जैसे ही बस में चढी़ पीछे एक युवक का पैर उसके पैर पर पड़ गया , सीमा ने उसे चिल्ला कर कहा दिखाई नही देता ,उस युवक ने साँरी भी कहा और कहने लगा गलती से ऐसा हो गया हे मैने जानबुझकर नही किया और वह युवक वही सीमा के पीछे ही खड़ा हो गया और अपने स्टाप पर उतर गया ।मनीष का आज पहला दिन था कालेज में , वह भोपाल से ट्रांसफर हो कर इंदौर के कालेज में आया था ।
कालेज में वह प्रंसिपल के कमरे में गया तो सर ने उसका परिचय अन्य शिक्षकों से कराया और कहा स्वागत है आपका इस विश्वविद्यालय में ,मनीष ने कहा सर स्वागत तो आज सुबह अच्छा खासा हो गयाहै फिर उसने बस में जो हुआ वह सब बताया सब हंसने लगे कहा कोई बात नही देवी का आशीर्वाद है।
मनीष अपनी कक्षा में पहुंचा तो देखा सभी विद्यार्थी चुपचाप खंडे हो गये तो यह देखकर मनीष ने कहा मै तुम्हारा शिक्षक तो हूँ लेकिन उससे पहले मै आप सभी लोगों का दोस्त बडा़ भाई बनना चाहता हूँ और तभी मैं आपको आसानी से पढा़ पाऊंगा सब ने हां में सिर हिला दिया मनीष हिन्दी विषय का शिक्षक बनकर इस कालेज में आया था
वह स्टाफ रुम में जा रहा था सामने से सुबह वाली लड़की दिखाई दी उसने कहा साँरी मेडम इतना सुनकर सीमा कहने लगी तुम यहाँ तक आ गये मेरा पीछा करते करते तब मनीष ने कहा मै ,यहाँ मै हिन्दी विषय पढा़ने आया हूँ यह कह कर वह चला गया । सीमा भी हिन्दी की शिक्षिका थी ।अब तो रोज ही उससे आमना सामना होने लगा ,सीमा हमेशा उसने नज़रें चुराती थी ।धीरे धीरे मनीष सर की लोकप्रियता बढ़ने लगी सभी लोग उसे इज्जत आदर देने लगे लेकिन सीमा ने कभी बात नही की ।
कालेज की तरफ से पिकनिक का प्रोग्राम बना और सभी पिकनिक मनाने मांडव गये सभी मस्ती कर रहे थे लेकिन सीमा चुपचाप बैठी थी तब मनीष ने रानी जो सीमा की खास सहेली थी उससे पूछा तुम्हारी सहेली हमेशा चुप क्यों रहती है तब रानी ने कहा सर उसके साथ एक हादसा हो गया था उसकी गुनाहगार वह खुद को समझती है । रानी ने कहा – वह छोटी थी तो उसका बालविवाह करा दिया गया था उसने उस समय कुछ नही कहा लेकिन बडे़ होने पर उसने अपने ससुराल वालों को कह दिया वह अपनी पढा़ई पूरी करके और नौकरी लगने के बाद ही वह ससुराल आयेगी ।ससुराल वालों ने इस बात का विरोध किया इधर सीमा के पिताजी ने भी कह दिया तू अगर ससुराल नही जायेगी तो मै जहर खा लूंगा ।तब सीमा को मजबूर होकर ससुराल जाना पडा़ ।वहाँ जाकर देखा उसका पति मंदबुद्धि था उसे अपनी किस्मत में बहुत रोना आया लेकिन उसके पिता ने कहा सीमा अब तुम्हारा यही घर है इसी परिवार में यही रहकर अपनी जिंदगी बिताओ और यह कहकर वह चला गये ।
दो चार दिन तो उसने वहाँ बिता दिये अपने पति को एक मरीज़ मानकर उसकी सेवा करने लगी ।लेकिन उसके पति का बडा़ भाई जो हमेशा उसे घूरता रहता था उससे उसे बडी़ घबराहट होती थी । लेकिन किससे कहे ,घर भर में सभी उससे डरते थे सारा घर खर्च वही करता था गांव का नेता भी था ।
एक दिन सीमा को अकेली पाकर उसके जेठ ने सीमा का बलात्कार कर दिया और कहा अगर किसी को बताया तो तेरे मरीज़ को मार डालूगा सीमा ने तब कुछ नही कहा लेकिन सास ससुर के आने पर सारी घटना बताई तो सास ससुर ने उससे ही कहा तुम हमारे बेटे को फंसाना चाहती हो क्योंकि तुम्हारा पति मंदबुद्धि जो है खबरदार आगे से इस के बारे में कुछ कहा तो अच्छा नही होगा
सीमा ने अपनी मां पिता को फोन पर कहा तो पिता उसके जेठ का दबदबा जानते थे कहने लगे उससे पंगा लेना मंहगा पडेगा ।तब सीमा की मां ने कहा तुम वहीं रुको मै तुम्हें लेने आती हूँ और वह पुलिस स्टेशन गई सारी बात बताई तो और पुलिस वालों के साथ वह सीमा के ससुराल पहुंची । पुलिस देखकर सारे लोग इकट्ठे हो गये सीमा का जेठ ने सीमा को ही बदचलन कहा तब सीमा ने सबके सामने कहा सर इनका मेडिकल करवा लीजिए सच्चाई सामने आ जायेगी सीमा ने अपने शरीर के घावों को भी बताया । पुलिस वालों की तेज आवाज़ और चीखने चिल्लाने की आवाज से सीमा के पति की ह्रदय गति रुकने से मौत हो गई। सीमा अपनी माँ के साथ मायके आ गई उसके जेठ को सजा हो गई तब से सीमा अपने माता पिता के साथ रहने लगी ।उसे हर आदमी में उसके जेठ की शक्ल दिखाई देती है । वह पढा़ई में बहुत होशियार थी इसी कालेज में आकर उसने अपनी अधूरी पढा़ई पूरी की और टाँपर थी तो इसी कालेज में नौकरी कर ली अब पिताजी गुजर गये है माँ के साथ रहती है ।इतना कहकर रानी खामोश हो गई । तब मनीष ने सीमा के पास जाकर कहा मेडम कुछ खा लीजिए हम लोंग पिकनिक मनाने आये है अनशन पर नही , मनीष की बात सुनकर सीमा ने कहा सर उस दिन के लिये माफी मांगती हूँ तब मनीष ने कहा माफी एक शर्त पर मिलेगी आपको अपने हाथ की बनी चाय पिलानी पडे़गी ।तब सीमा और रानी ने कहा – ठीक है सर आप कभी भी आ जाइये तब मनीष ने कहा कभी क्यों आज क्यों नही मै पिकनिक से सीधा आप लोगों के साथ ही सीमा के घर चलूगा ।सीमा ने कहा ठीक है आप चल सकते है
पिकनिक के बाद तीनों सीमा के घर पहुंचे ।सीमा का घर छोटा किन्तु साफ सुथरा था ।किसी अजनबी को देखकर सीमा की मां ने पूछा तब सीमा और रानी ने कहा ये हमारे कालेज के नये सर है पिकनिक से सीधे हमारे घर आये है चाय पीने ,
सीमा जल्दी से चाय और बिस्किट ले आई तब मनीष सीमा के सामने खडे़ होकर कहने लगा सीमा मै तुम्हें कैसा लगता हूँ सीमा कुछ कह पाती इससे पहले रानी ने सीमा से कहा मनीष सर तुझसे शादी करना चाहते है उन्हें तेरे अतीत के बारे में सब मालूम है । तब मनीष ने कहा सीमा क्या तुम मेरे साथ अपना वर्तमान और भविष्य बिताना पसंद करोगी तब सीमा ने कहा सर आप बहुत जल्दबाजी में फैसला कर रहे है आप अपने माता पिता से बात कर ले तब मनीष ने कहा मैने रानी से बात करने के बाद मेरे मां पापा से सारी बात कर ली है वह लोग सुबह सगाई का सामान लेकर तुम्हारे घर आ जायेंगे , बस तुम अपना फैसला मेरे हक में दे दो । मै तुम्हारे साथ जीना चाहता हूँ सीमा ने भी हां कह दिया यह देखकर सीमा की मां की आँखो में आंसू आ गये तब मनीष ने कहा मां आज आपको एक बेटा मिल गया है । शादी के बाद आप अपनी बेटी के घर नही अपने बेटे के घर में रहेंगी
इतना कहकर मनीष चला गया सीमा सोचने लगी क्या दुनिया में अच्छे लोग भी रहते है और अपने आने वाली जिंदगी के सपने देखने लगी उसके मन से उस दिन का खौफ खत्म हो गया था ।

रेणु फ्रांसिस
इंदौर, मप्र

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