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बिजली के करंट लगने से हुई मोतो के लिए आखिर दोषी कौन ? मृतको को ही दोषी बता कर विधुतमण्डल अपने को बता रहा पाक साफ

दिनेश शर्मा
आष्टा,एमपी मीडिया पॉइंट

जानकारी अनुसार- बीते माह में तीन जगहों पर बिजली विभाग के जिम्मेदारो की लापरवाही या हठधर्मिता के कारण तीन लोगों की बजली के करंट लगने से मौत हो गयी । पर विभाग के जिम्मेदारो को आज भी चिंता नही है ।
आपको बता दे 10 जून को आष्टा निकट ग्राम नानकपुर में एक व्यक्ति की घर के आंगन में पड़ी खम्बे से टूटकर केबल से करंट लगने से म्रत्यु हुई थी, घटना के बारे में म्रतक के परिजनों और पड़ोसियों के कहना रहा कि खम्बे से जब केबल टूटी थी हमने तुरन्त बिजली कर्मचारी ओर जेई यादव को बता दिया था, किन्तु कोई भी सुधारने नही आया , तब हमने इस केबल को ब मजबूरी एक पेड़ से बांध दिया था, किन्तु बिजली कर्मचारियों की उदासिनता से यह केबल रात को पेड़ से टूट कर म्रतक के आंगन में गिर गयी, ओर उस केबल से करंट लग जाने से घर के मुखिया की म्रत्यु हो गयी,
करंट लगने की दूसरी घटना पर नजर डालें तो भंवरा ग्राम में जेई कुशवाह लाइनमैन कमल सिंह मेवाड़ा ओर एक ओर अपने साथी के साथ चेकिंग कर रहे थे, की चेकिंग के इलेवन केवी की लाइन के पास से चालू लाइन की डोरी खिंचने से जो लापरवाही बरती गई उससे बिजली विभाग के लाइन मेन की ही म्रत्यु हो गयी, आश्चर्य यह है कि यह सारा घटनाक्रम जेई की मौजूदगी में हुआ , जेई के साथ खड़े लाइनमैन ने आखिर चालू लाइन में काम किस के आदेश से मजबूरी वश किया यह जाँच का विषय है । कयोकि जब 11वन केवी लाइन के पास आप कार्य करने जा रहे हो तो सप्लाई बंद कयो नही की ?, जबकि अधिकारी स्वंय साथ खड़ा है अब ऐसे में लाइनमैन की मौत का आखिर जिम्मेदार कौन ?
विधुत करंट से मौत का मामला यही नही थमा, अभी हाल ही में जावर थानाक्षेत्र में फ़ूडरा के जंगल मे एक किसान के खेत मे 33 केवी लाइन पर ट्रांसफर रखते समय अचानक करंट लगजाने से एक युवक की म्रत्यु हो गयी,
इस घटना के बारे में बताया जा रहा है कि बिजली विभाग में ठेकेदारी का कार्य करने वाले मजीद खा का काम चल रहा था जहां ठेकेदार का कर्मचारी राहुल पिता रमेश मालवीय निवासी सेवदा खम्बे पर चढ़ कर कार्य कर रहा था कि अचानक लाइन में करंट आ जाने से राहुल वही चिपक गया और उसकी म्रत्यु हो गयी,
इस घटना के बारे में ठेकेदार मजीद का कहना है कि घटना दिनांक को मैने कार्य करने के लिए सुबह 11:30 बजे से 12:00 बजे याने आधे घण्टे का लाइन बन्द रखने का परमिट लिया था, फिर अचानक खम्बे में करंट कयो ओर कैसे आया? किसने लाइन चालू की, यह जाँच का विषय है ।
म्रतक की मौत जिस तरह से हुई उससे ऐसा लगता है कि खम्बे पर चढ़े कर्मचारी के पास डिस्चार्ज रॉड भी उपलब्ध नही थी, जो कि करंट से बचने का बड़ा सुरक्षा उपाय माना जाता है , इस घटनाक्रम में बड़ी बात यह है कि जब लाइन बन्द रखने का स्वीकृति परमिट डोडी सब डिवीजन ने दिया था फिर परमिट के निशिचत समय मे लाइन में करंट कैसे आया ?
करंट से हुई इन तीनो घटनाओं के बारे में जब डिवीजन ऑफिसर राजीव रंजन से विंभाग का पक्ष जानना चाहा तो तीनों ही मामलों में साहब अपने कर्मचारियों का बचाव करते नजर आए, ओर अपने कर्मचारियों को दोष मुक्त बताते हुए अपनी लापरवाहियों को छुपाते नजर आये,।
हैरत वाली बात है कि अधिकारी राजीव रंजन भी इतनी गम्भी रूप से हुई मौतो के लिए मृतको को ही उनकी मौत का जिम्मेदार ठहराने लगे।
जबकि घटित घटनाक्रम जो परिलक्षित हो रहे है उससे बहुत हद तक लगता है, की इन मामलों में विंभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही व उदासिनता रही है , वरना बारिश के मौसम इस तरह से निगरानी में लापरवाही पूर्ण तरीके से कार्य नही कराए जाते,
वही मृतको के परिजन भी विधुतमण्डल के अधिकारियों और कर्मचारियों पर लापरवाही ओर उदासिनता के खुले आरोप लगा रहे है ।

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