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देश में बढ़ती मंहगाई और बेरोजगारी के खिलाफ लामबंद क्यों नहीं होते कांग्रेस नेता

विजया पाठक,

कमलनाथ एक ऐसे कांग्रेसी नेता हैं जिन्‍होंने शुरूआत से ही कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ा। जब-जब कांग्रेस मुसीबत में आयी कमलनाथ सबसे आगे खड़े रहे। कमलनाथ के इसी समर्पण को लेकर पिछले दिनों मीडिया में कमलनाथ को कांग्रेस का राष्‍ट्रीय कार्यकारी अध्‍यक्ष बनाने की बात उछली। लेकिन कमलनाथ ने कहा कि वह कार्यकारी अध्‍यक्ष नहीं बन रहे हैं। अब इसकी वजह क्‍या है, अभी तक स्‍पष्‍ट नही है। वैसे एक बात सही है कि इस समय कमलनाथ कांग्रेस का नेतृत्‍व करते तो नई दिशा मिलती। क्‍योंकि‍ हम जानते हैं कि इस समय कांग्रेस बुरे दौर से गुजर रही है। पार्टी को संबल प्रदान करने में कमलनाथ जैसे नेताओं की बहुत जरूरत है। जिन्‍होंने विषम परिस्थितियों में भी पार्टी का साथ दिया। हमने देखा है कि इस समय कई पुराने कांग्रेसी नेता हैं जो सत्‍ता और पद की लालसा में पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं। पहले मप्र में ज्योतिरादित्य सिंधिया और खेमे के विधायकों ने दल बदलकर कमलनाथ सरकार को गिरवाया। वहीं, अब सिंधिया राजस्थान की गेहलोत सरकार को सचिन पायलट के साथ मिलकर गिराने में जुटे हुए हैं। सूत्रों की मानें तो गेहलोत सरकार पर कभी भी सत्ता बचाए रखने जैसी मुसीबतें आ सकती हैं। इतना ही नहीं पंजाब में भी सत्ता सियासत पर खूब खेल खेला गया। इस समय में रार्ष्‍टीय स्‍तर पर और प्रदेश स्‍तर पर अच्‍छे जुझारू नेताओं की आवश्‍यकता है। जो बड़े स्‍तर पर सत्‍तासीन सरकार के खिलाफ आवाज उठाये और जनता के बीच जाकर सरकार की नाकामियों को उजागर करें।
जहां तक मध्यप्रदेश की बात करें तो प्रदेश में कांग्रेस पार्टी पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में एक्टिव है और लगातार शिवराज सरकार द्वारा लिए जाने वाले ऐसे फैसले जिनसे जनता का सीधे कोई सरोकार नहीं है, उनका खुलकर विरोध करती है। विरोध होना भी चाहिए, नहीं तो सत्ता में बैठी पार्टी के नेता हिटलरशाही पर उतर आएंगे और मनमाफिक ढंग से मंहगाई में बढ़ोत्तरी होती रहेगी।
इस बात में कोई दो राय नहीं कि विपक्ष की कांग्रेस पूरे देश में जहां-जहां कांग्रेस शासित राज्य है वहां अपने ही नेताओं के विरोध का शिकार हो रही है और उन्हीं को मनाने में जुटी हुई है। ऐसे में कांग्रेस विपक्ष की भूमिका सही ढंग से निभाने में पीछे हो रही है। देश इन दिनों बड़ी ही अजीब स्थिति से गुजर रहा है। बीते लगभग डेढ़ वर्ष से जहां देश की आवाम कोरोना के संक्रमण से जूझती रही। वहीं, अब संक्रमण काबू आने के बाद अब देश के लोग मंहगाई, बेरोजगारी सहित आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। हर कोई बेलगाम होती महंगाई का दोषी केंद्र की मोदी सरकार को बता रहा है। दोषी बताए भी क्यों न। देश में आज बेरोजगारी और बढ़ती मंहगाई ये दोनों बड़े मुद्दे बन गए हैं। जिससे आज आम आदमी दो-चार हो रहा है। एक समय हुआ करता था जब कांग्रेस सरकार सत्ता में थी और उसके कार्यकाल में दो से तीन रूपए भी पेट्रोल या डीजल के दाम बढ़ते तो विपक्ष में बैठी भाजपा सरकार के नेता जमकर संसद से सड़क तक विरोध करते थे। लेकिन विपक्ष में बैठी कांग्रेस पार्टी के पक्ष में यह बात बिल्कुल सही पड़ती नहीं दिखाई। हर कांग्रेसी नेता चुप्पी साधे बैठा हुआ है और बढ़ती मंहगाई और बेरोजगारी के खिलाफ मोर्चाबंदी करने, विरोध करने जैसा कोई कदम नहीं उठा रहा। यही वह समय है जब कांग्रेस जनता की आवाज बनकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर सकती है। देश की तमाम समस्‍याओं को लेकर सड़क पर उतर सकती है। जैसे एक समय महात्‍मा गांधी जनता के लिए आंदोलन करते थे और सारी जनता उनके साथ खड़ी होती थी। आज देश में सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ आंदोलन करने वाले नेताओं की जरूरत है।

पेट्रोल,डीजल के भावों में वृद्धि से जनता बेहाल- अजय माकन…

बीते दिनों कांग्रेस महासचिव अजय माकन भोपाल पहुंचे। जहां उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए मीडिया पर सवाल उठाया कि मीडिया कांग्रेस के कार्यों को ज्यादा पब्लिसिटी नहीं देती है। वे कांग्रेस नेताओं को इग्नोर करते हैं और भाजपा नेताओं की पब्लिसिटी खूब करते हैं। माकन साहब को यह बात अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए कि मीडिया और पत्रकार किसी एक दल या नेता के लिए काम नहीं करते हैं। अगर कांग्रेस सरकार मंहगाई और बेरोजगारी का कड़ा विरोध करे तो मीडिया उसे जरूर कवर करेगा। उदाहरण के लिए कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कोरोनाकाल के दौरान प्रदेश के कई स्थानों पर ऑक्सीजन टैंक, अस्पतालों में व्यवस्था आदि से जुड़े कार्य किए, जिसे मीडिया ने बराबरी से कवर किया और जनता तक कमलनाथ के कार्यों को पहुंचाया। माकन ने कहा कि यूपीए सरकार के समय 27 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से निकाला था। लेकिन मौजूदा सरकार ने 23 करोड़ लोगों को वापस गरीबी रेखा के नीचे धकेल दिया है। मई महीने में दो करोड़ लोगों की नौकरी चली गई है। 97 फीसदी लोगों को कम वेतन मिल रहा है। माकन ने कहा महंगाई बढ़ने पर कांग्रेस नेता डांस तो नहीं कर सकते। हां सड़क पर उतरकर प्रदर्शन जरूर करेंगे। 2017 की वृद्धि दर 8.2% 2020 में घटकर 4.1 फ़ीसदी हो गई। पेट्रोल और डीजल के दामों में बेतहाशा वृद्धि के कारण आम लोगों का जीना मुहाल हो गया है। अजय माकन ने 1 अप्रैल 2021 से 12 जुलाई 2021 के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 66 बार वृद्धि करने का आरोप लगाया।

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