लेख

जब भीग गईं आंखें…

जयंत शाह

यह किसी कहानी का शीर्षक नहीं, वास्तविक ज़िन्दगी का वह किस्सा है।
जिसने इसको देखा सुना उसकी भी आंखें नम हो गई। कोरोना के मार्फत काल के क्रूर पंजों ने बहुत से अपनों को हमसे छीना है लेकिन मुसीबतों की बिजली उस परिवार पर गिरी , जिसका मुखिया उनके बीच नहीं रहा। ऐसा ही गांव है लसूड़िया परिहार जहां महेंद्र त्यागी की मृत्यु के बाद परिवार की तीन बेटियां अपने हिस्से का पिता का प्यार दुलार खोने के बाद गमगीन थीं। इसी दौरान ऐसा वाकया घटा जिसने हर आंख को एक बार फिर नम कर दिया लेकिन इस बार ये आंसू खुशी के थे।विश्वव्यापी महामारी कोरोना के कारण ऐसे समय मे जहां सभी कहीं न कहीं अपनो को खोने के कारण गमगीन हैं. जिन परिवारो मे कोई अपना दीवंगत हो गया है. उनके बीच पंहुचकर प्रेम और सांत्वना व्यक्त कर ,जाने वाले को वापस तो नहीं ला सकते परंतु शोकग्रस्त परिजनो को ढांढस देकर उनका मनोबल तो बढा ही सकते हैं.और सांत्वना के शब्द किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति द्वारा मिले तो और भी तसल्ली मिलती है.गत 12 जुलाई को मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वर्तमान राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह “दिग्गी राजा” सीहोर के दौरे पर पहुंचे दौरे का उद्देश्य था, कोरोना काल में दिवंगत लोगों के परिजनों से मिलना एवं उनके दुख में सहभागी होना . परिजनों को सांत्वना देना एवं मनोबल बढ़ाना ही पूरे दिन भर के सीहोर दोरे का उद्देश्य था।

सीहोर मे पूर्व निर्धारित सभी लोगों के यहां दिवंगत आत्मा को श्रद्धा सुमन अर्पित कर जब भोपाल वापसी होने लगी तभी अचानक राजा साहब ने जिला कांग्रेस अध्यक्ष बलवीर तोमर से पूछा ग्राम लसूडिया परिहार में अपनी पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता महेंद्र त्यागी भी कोरोना काल में हमसे बिछड़ गए वहां भी आज चलते हैं. गाड़ियों का काफिला जा पहुंचा ग्राम लसुडिया परिहार क्योंकि स्वर्गीय महेंद्र त्यागी जी का घर सकरी गली में होने के कारण चार पहिया वाहन वहां नहीं जा सकते थे . सभी कार्यकर्ताओं सहित दिग्विजय सिंह पैदल ही उनके घर पहुंचे . स्वर्गीय महेंद्र त्यागी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद उनके परिजनों से भेंट की एवं सांत्वना प्रदान की उस समय बहुत ही भावुक पल उपस्थित हो गये. जब स्वर्गीय महिंद्र की तीनों बेटियां से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बात की एवं पुराने कुछ स्मरण सुनाएं. एवं अपना स्वयं का मोबाइल नंबर उनकी बेटियों को देते हुए कहा किसी भी समय किसी भी दुख तकलीफ में है या किसी भी कार्य से यदि मेरी सहायता की आवश्यकता हो तो निसंकोच फोन कर सकती है।यह बोलते समय जहां राजा साहब के नेत्रों में नमी थी वही महिंद्र की तीनों बेटियों की आंखें भी गीली हो गई एवं वहां उपस्थित सभी कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की भी आंखें सजल हो गंई .
तीनों पुत्रियों को यह विश्वास हो गया कोई मजबूत एवं प्रभावशाली व्यक्ति उनकी इस दुख की घड़ी में ना केवल सांत्वना प्रदान करने बल्कि उनकी मदद करने का वादा लेकर आया है अपने आंसू नहीं रोक पाईं .
मैं इस पूरे घटनाक्रम का साक्षी रहा।पूरे प्रदेश के सुदूर से सुदूर तक कहीं पर भी रहने वाले अंतिम पंक्ति के कॉग्रेस कार्यकर्ता जिन्हें आशा भरी नजरों से देखता है . वह शख्सियत है दिग्विजय सिंह जी राजा साहब केवल नाम से ही नहीं अपने काम से ..हृदय से भी सही अर्थों में राजा है. पूरे कोरोना काल जिस तरह से अपने स्वास्थ्य की परवाह ना करते हुए दिग्विजय सिंह ने लोगों की सेवा की है अनुकरणीय है. कोरोना की पहली लहर में प्रतिदिन सैकड़ों लोगों के भोजन की व्यवस्था करने का जो बीड़ा उठाया था . उसी प्रकार दूसरी लहर के समय जगह जगह ऑक्सीजन की व्यवस्था अपने कार्यकर्ताओं के सहयोग से एवं टेलीफोन के द्वारा जितनी हो सकती है मदद आम जनता की मदद करने का प्रयास दिग्विजय सिंह द्वारा किया गया अनुकरणीय है. अनुमोदनीय है. प्रेरणादायक है.

(–जयंत शाह – सीहोर )

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