साहित्य का सोपान

याद है….

…याद है!
वो दिन …जब__
मुझसे दो दिन भी
न मिल पाने पर….
तुम हो जाते थे बेचैन
और____

खोजते थे बहाने….
किसी तरह मेरी एक झलक पाने को
फ़ोन पर भी…..
तुम्हारी बेचैनी दिख जाती थी मुझे ___

और मैं खुद पर रीझ जाती थी ___

कितने खूबसूरत दिन थे…
जब थे मैं -और तुम
एक दूसरे से कुछ परिचित,
कुछ अनजान____

आज साथ रहते
कितने बरस बीत गये ___
दावा करते है,
एक दूसरे को पूर्णता: जानने का…

काश! के न आती
प्यार की पूर्णमासी कभी___

फिर… एक बार चाहती हूँ,,
कुछ अनजान,,,
कुछ अपरिचित,,
यूँ ही ____
तुम बने रहते मुझमें ____

और जिन्दगी….
गुज़र जाती….
यूँ ही…..

तुम्हे हर दिन –
__हर पल
___और जानने में ___
और चाहने में…!!!

माधुरी द्विवेदी “मधु”
कानपुर ( यू. पी.)

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