महाराष्ट्र

अमेरिका की सैर….

अमेरिका की सैर….

“ अमेरिका “ ये नाम सुनते ही लोग समझते हैं कि वहाँ स्वर्ग है और वहाँ डालर ही डालर बरसते हैं ।जो भी अमेरिका जाता है उसे जाते ही नौकरी मिल जाती है और ख़ूब पैसा कमाते हैं ।ये सब सुनी सुनाई बातें हैं ।बिना मेहनत के कुछ भी नहीं मिलता ।खाना भी खाओगे तो हाथ को भी मुँह तक तो ले जाना ही पड़ेगा ।

यहां कर्म ही पूजा है ।बड़ी मेहनत से पैसा मिलता है ।सुबह आठ बजे से शाम के सात बजे तक काम करना पड़ता है ।कभी-कभी शनिवार इतवार छुट्टी के दिन भी काम करना पड़ता है ।

अपनी भारतीय संस्कृति और यहाँ की संस्कृति में बहुत अंतर है ।यहाँ पर काफ़ी खुलापन हैं ।यहाँ परिवार ज़्यादा बड़े नहीं होते ।बस मियाँ बीबी और दो बच्चे ।किसी का एक बच्चा भी रहता है और किसी के एक भी नहीं।जिनके बच्चे नहीं होते,वो कुत्ते बिल्ली पालते हैं ।यहाँ सत्रह अठारह की उम्र में बच्चे घर से निकल जाते हैं ।उनके बायफरेंड और गर्लफ़्रेंड होते हैं ।उन्हीं के साथ रहने लगते हैं ।

वो लोग छोटी उम्र से ही कमाने लगते हैं ।यहाँ पर कोई भी काम छोटा बड़ा नहीं होता ।जो भी काम मिलता है वो करते हैं ।माँ बाप ख़ुद चाहते हैं कि बच्चे कमाने लगें और अलग रहें ।जब माँ बाप बच्चों को नहीं रखते तो बच्चे भी उन्हें नहीं रखते ।उनके साथ रहना पसंद ही नहीं करते ।मदर्स डे फादर्स डे और जन्मदिन पर माँ बाप से मिलते हैं या फूलों का गुलदस्ता भेज कर अपने कर्तव्य को पूरा कर लेते हैं ।

यहाँ पर पति पत्नी में मतभेद होने पर वो साथ नहीं रहते।जल्द ही तलाक़ हो जाता है ।घर भी जल्द बदल लेते हैं ।ज़िंदगी को ज़िंदादिली से जीते हैं ।कार भी एक दो साल में बदल लेते हैं।कई लोग बुढ़ापे में बहुत ज़्यादा बड़े से बड़े घर में रहना पसंद करते हैं ।यहाँ पर अधिकांश घरों में स्वीमिंग पुल होते हैं।यहाँ के सभी बच्चों को बहुत जल्दी तैरना आ जाता है ।

यहाँ पर लेबर चार्जेस याने मज़दूरी बहुत ज़्यादा है ।यदि घर की कोई चीज ख़राब हो जाये तो,उसे सुधरवाने में जितना पैसा लगता है,उतने में आदमी नई चीज़ ले लेता है ।इसी से लोग यहाँ पर चीज़ें बिगड़ने पर उन्हें फेंक कर नई ले लेते है ।

हर जगह की तरह यहाँ के भी कुछ माइनस तो कुछ प्लस प्वाइंट हैं।यहाँ पर कामचोरी बिलकुल नहीं होती ।काम के प्रति लोग समर्पित रहते हैं ।तभी पैसा मिलता है ।यहाँ पर पति पत्नी दोनों काम करते हैं ।यहाँ की ज़िंदगी बहुत कठिन है ।बहुत बिजी लाईफ़ है।शनिवार इतवार छुट्टी रहती है,पर हफ़्ते भर का काम करना पड़ता है ।घर की सफ़ाई,बाज़ार बच्चों का होमवर्क व अन्य काम करने पड़ते हैं ।उन्हें अपने लिये सोचने या कुछ करने की फ़ुर्सत ही नहीं है ।क्योंकि यहाँ नौकर नहीं होते ।नौकर रखेंगे तो वो आपका आधा वेतन ले जायेगा क्योंकि लेबर चार्जेस याने मज़दूरी बहुत ज़्यादा है ।

फिर भी यहाँ के लोग ज़िंदगी अच्छी तरह से जीते हैं ।शनिवार को अक्सर पार्टियाँ होती हैं ।सब कुछ भुलाकर मस्ती करते हैं ।पार्टियाँ सुबह तक चलती है ।इतवार को आराम करते हैं ।

अमेरिका में सबसे बड़ी बात है “ सुरक्षा “ आपके अपने घर में अलार्म सिस्टम रहता है ।आपका ख़ुद का कोड होता है ।जब आप घर से बाहर जाते हैं तो अलार्म लगा कर जाते हैं ।इस बीच यदि आप के घर में कोई घुस जाता है तो तुरंत अलार्म बज जाता है और पुलिस तुरंत पहुँच जाती है ।

इसी तरह यदि घर में कोई दुर्घटना हो जाये तो आप तुरंत ९११ काल करिये,पाँच मिनिट के अंदर पुलिस पहुँच जायेगी।बच्चों को भी बचपन से सिखाया जाता है कि घर में कोई दुर्घटना हो जाये तो ९११ काल करें।वैसे भी बच्चों को यहाँ पर जब तक वो बारह साल के नहीं हो जाते उन्हें घर में अकेले नहीं छोड़ा जाता।यदि कोई माँ बाप बच्चों के बारह साल पूरे होने के पहले घर पर अकेला छोड़ देते हैं और पुलिस को पता चल गया तो माँ बाप को सजा भी हो सकती है ।

दूसरी बात जो यहाँ पर बहुत अच्छी है वो है आदमी की जान की “ सुरक्षा “। यदि सड़क पर कोई एक्सीडेंट हो जाता है तो लोग दौड़कर उसकी मदद करते हैं।तुरंत पुलिस आ जाती है ।ज़्यादा चोट लगने पर ज़रूरत पड़ने पर हैलीकाप्टर से भी जल्दी से अस्पताल ले जाते हैं ।बाद में गवाही ली जाती है ।

इसी तरह बच्चों की सुरक्षा पर भी बहुत ध्यान दिया जाता है ।जहां से भी बच्चों की स्कूल बस निकलती है तो बस को पहले जाने दिया जाता है और बच्चे जिस भी स्टाप पर उतरते हैं तब पीछे से आने वाली कारें सब रूकी रहती हैं।जब बच्चे सड़क पार कर लेते हैं और बस चली जाती है तभी कारें आगे बढ़ती है ।

यहाँ पर सफ़ाई का बहुत ध्यान दिया जाता है ।रास्ते में जगह- जगह डस्टबिन रखे रहते हैं ।उन्हीं में कचरा फेंका जाता है ।बच्चे भी इसका ध्यान रखते हैं,उन्हें ये सब बचपन से ही सिखाया जाता है ।पहले कोई सड़क पर कोई कचरा फेंक देता था तो पचास डालर जुर्माना लगता था ।जो इंडियन करेंसी में ढाई हज़ार रुपये होता था ।

अमेरिका में आप कहीं भी घूमने जायें तो रास्ते में आपको दो चार मील की दूरी पर बाथरूम मिलेंगे ।जहाँ आप रूक कर फ़्रेश हो सकते हैं।यहाँ सड़क पर कोई नहीं जाता।बाथरूम को रेस्टरूम कहते हैं, जो कि बहुत साफ़ सुथरे रहते हैं ।यहाँ पर पानी पीने की व्यवस्था रहती है ।साथ ही छोटी दुकान भी होती है ।जहाँ से आप पैसे डालकर कोल्डड्रिंक चिप्स ले सकते हैं ।

अमेरिका में लोग बहुत मोटे होते हैं ।क्योंकि अमेरिका चाकलेट,केक पेस्ट्री आइसक्रीम कोल्डड्रिंक के लिए और काफ़ी के लिये भी प्रसिद्ध हैं ।यहाँ के लोग ये सब बहुत ज़्यादा खाते हैं इससे मोटे हो जाते हैं और फिर जिम जाते हैं,दौड़ लगाते हैं और पतले होने और फ़िट रहने के लिए साइकिल चलाते हैं।यहाँ पर सबसे ज़्यादा कमाई दाँत के डाक्टर की होती है ।दाँत का इलाज बहुत महँगा होता है।ज़्यादा चाकलेट आइसक्रीम खाने से दाँत बहुत जल्द ख़राब होते हैं ।दाँत का इलाज महँगा होने से यहाँ पर रहने वाले भारतीय इंडिया जाकर इलाज करवाते हैं क्योंकि दाँत के इलाज का इंश्योरेंस नहीं होता।

यहाँ पर सबसे ज़्यादा परेशानी डाक्टर की होती हैं ।बहुत पहले से डाक्टर का अपाइंटमेंट लेना पड़ता है।कभी-कभी महने भर तक अपाइंटमेंट नहीं मिलता।बड़ी परेशानी होती है।ज़्यादा तकलीफ़ हो तो इमरजेंसी में अस्पताल जाइये।वहीं पर इलाज होगा।कभी-कभी वहाँ पर भी भीड़ होती है।यहाँ पर बिना इंश्योरेंस के कोई भी डाक्टर आपको हाथ भी नहीं लगायेगा।डाक्टर बहुत सावधानी रखते हैं क्योंकि यदि मरीज़ को कुछ हो गया तो उ नका लाइसेंस रद्द कर दिया जायेगा ।

यहाँ पर बहुत बड़े- बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर्स होते हैं ।यहाँ के माल बहुत शानदार होते हैं ।आप अपनी ज़रूरत की सभी चीजें वहाँ पर ख़रीद सकते हैं यहाँ पर माल में और हर दुकान में रेस्टरूम बने होते हैं ।हर दुकान वाले को अपनी दुकान में रेस्टरूम ज़रूर बनवाना होता है।ये वहाँ की सरकार का आदेश रहता है।जिससे साफ़ सफ़ाई बनी रहे।

यहाँ का क़ानून बहुत कठोर है,हर नागरिक को उसका पालन करना पड़ता है ।सड़क पर चलने के नियम नहीं तोड़े जा सकते,नही तो जुर्माना भरना पड़ता है।कार चलाने के लिए स्पीड लिमिट है ।जितनी गति निर्धारित है,उसी के अनुसार कार चलाना पड़ता हैं।ट्रैफ़िक लाइट्स का ध्यान रखना पड़ता है ।आपको रुकना पड़ता है ।आप बीच में से कहीं से भी कार निकाल कर नहीं ले जा सकते।पुलिस बराबर ध्यान रखती है ।गल्ती करने पर पकड़ती है और टिकिट दे देती है।यदि आपको तीन बार टिकिट मिल गई तो। आपका लाइसेंस ज़ब्त हो जायेगा ।और आप समझ सकते हैं कि यहाँ बिना कार के आदमी बेकार हो जाता है ।

यहाँ पर जब आप शापिंग माल में सामान ख़रीदने जाते हैं तो आप वहाँ पर बहुत कुछ देख सकते हो ।पर कुछ भी सामान नहीं चुरा सकते,क्योंकि हर सामान पर टैग लगा रहता है ।यदि आप कोई सामान चुरा लेते हैं तो दरवाज़े से बाहर निकलते ही अलार्म बज जायेगा और आप पकड़े जायेगें।

यहाँ पर ज़्यादातर घर लकड़ी के बनते हैं।पर एक बात बहुत अच्छी है कि घर बनाने के लिए जितनी लकड़ी की ज़रूरत होती है उतने ही पेड़ 🌳 काटे जाते हैं और फिर वहाँ उतने ही पौधे लगा दिये जाते हैं जिससे प्रकृति को कोई नुक़सान न पहुँचे ।यहाँ फ़्लोरिडा में बहुत ही हरियाली है।यहाँ पर समुद्र बहुत हैं।तो यहाँ तूफ़ान भी बहुत आते हैं ।तूफ़ान के आसार नज़र आते ही लोग बहुत सारा सामान ख़रीद कर घर में रख लेते हैं क्योंकि यदि भयंकर तूफ़ान आता है तो लोग घर से निकल पाते।

यहाँ पर लोग कुत्ते बिल्ली ज़्यादा पालते हैं ।शाम को ये लोग अपने कुत्ते घुमाते आपको मिल जायेंगे ।इनके हाथ में एक पालीथिन की थैली रहती है।यहाँ कुत्ते किसी के घर या रास्ते पर पाटी कर देते हैं तो ये लोग ग्लोबस पहने रहते हैं ।पाटी उठाकर थैली में डाल देते हैं ।जिससे गंदगी न फैले ।यहाँ पर बाज़ार में कुत्ते के लिए अलग से स्टोर होते हैं जहाँ पर सिर्फ़ इनका ही खाना मिलता है।ये अपने कुतों को बहुत अच्छी ट्रेनिंग देते हैं ।ये अपने मालिक की हर बात मानते हैं ।

पर अब तो अमेरिका में भी काफ़ी बदलाव आ गया है ।कारण अब यहाँ पर बहुत से देशों के लोग नौकरी करने आ गये हैं ।इंडिया से बहुत सारे लोग भी यहाँ नौकरी करने आये हैं ।जो अमेरिका के हर राज्य में फैले हुये है ।हम लोग फ़्लोरिडा के जैकसनविल शहर में रहते हैं ।

यहाँ पर केवल जैकसनविल में ही दस हज़ार से भी ज़्यादा भारतीय रहते हैं।जो भारत के हर राज्य से आये हैं।यहाँ पर टी. सी. एस. के बहुत लोग हैं।यहाँ पर मंदिर भी है जहाँ पर रोज़ाना लोग जाते हैं।सारे भारतीय त्यौहार इंडिया से भी ज़्यादा अच्छें तरीक़े से मिल जुलकर लोग मनाते हैं,।नवरात्रि,दुर्गा पूजा,दीवाली,होली,राखी।तीजा,करवा चौथ ।गणेश चतुर्थी,जन्माष्टमी कहने का मतलब हर त्यौहार बहुत ही अच्छे तरीक़े से मनाये जाते हैं ।यहाँ रहकर भी कोई भी अपनी भारतीय संस्कृति को नहीं भूले हैं ।यहाँ पर मंदिर के अलावा गुरुद्वारा चर्च मस्जिद और साईंबाबा का मंदिर भी है ।

उस समय बहुत अच्छा लगता है ।जब महिलायें साड़ी और ज़ेवर पहनकर आती हैं और पुरूष वर्ग पाजामा – कुर्ता पहन कर आते हैं ।उस समय महसूस ही नहीं होता कि हम भारत में नहीं है ।

जैकसनविल से तीन घंटे का रास्ता है आरलैडों का।जहाँ डिज़्नीवल्ड है ।जिसे देखने दूर- दूर से लोग आते हैं ।बच्चे बहुत मज़ा करते हैं।तरह-तरह के शो देखने मिलते हैं ।साथ ही यहाँ से सात आठ घंटे की दूरी पर मयामी है ।यहाँ के ‘बीच’ देखने लायक़ हैं ।एक जमाने में यहाँ पर विश्व सुन्दरियां चुनी जाती थीं ।

फ़्लोरिडा का मौसम बिलकुल इंडिया के जैसा है ।यहाँ पर बर्फ़ नहीं गिरती।इसी से अधिकांश लोग रिटायरमेंट के बाद फ़्लोरिडा में बसना चाहते हैं ।अब तो यहाँ पर हर जगह इंडियन रेंस्तरा खुल गये हैं ।जहाँ पर सभी तरह का इंडियन खाना मिलता है ।शनिवार इतवार को काफ़ी भीड़ रहती है ।सबसे आश्चर्य की बात ये है कि अमेरिकन इंडियन खाना बहुत पसंद करते हैं,ख़ासकर तीखा ।रेस्तराँ में काफ़ी भीड़ रहती है।

यहाँ आकर भारतीय भी ज़िंदगी को भरपूर जीते हैं ।शनिवार को जो पार्टियाँ होती हैं,उसमें बच्चों से लेकर बूढ़े- औरतें सभी डांस करते हैं ।अपनी हफ़्ते भर की थकान दूर करते हैं।सभी लोग अपने से बड़े लोगों का आदर करते हैं और पैर छूते हैं ।

यहाँ के ‘ओल्ड – होम’ बहुत ही अच्छे हैं ।उसमें सारी सुख सुविधायें रहती हैं ।सभी के कमरे अलग- अलग होते हैं।समय से चाय नाश्ता व दोनों समय खाना मिलता है ।स्वास्थ्य के प्रति बहुत ध्यान रखा जाता है ।सफ़ाई भी बहुत रहती है।

यहाँ के ‘ओल्ड- होम ज़्यादातर अमेरिकन लोगो के हैं रिटायरमेंट के बाद जब तक ये लोग स्वस्थ रहते हैं,तब तक घर में रहते हैं।बाद में जब असक्त हो जाते हैं।तो ‘ ओल्ड- होम’रहने लगते हैं,जहाँ पर उनका खुद का पैसा लगता है ।जब पति पत्नी दोनों में से कोई अकेला रह जाता है तो यहाँ की सरकार सुरक्षा की दृष्टि से एक माला देती है जिसमें यंत्र लगा रहता है ।वो २४ घंटे पहने रहते हैं।घर में गिर जायें या कोई दुर्घटना हो जाये तो वो यंत्र दबा देने से पुलिस तुरंत पहुँच जाती है और उन्हें अस्पताल पहुँचा देती है।यहाँ पर आदमी की जान की सुरक्षा पर भी बहुत ध्यान दिया जाता है ।

यहाँ पर गरीब लोग भी बहुत होते हैं,जिनके सिर पर छत नहीं होती।उनके रहने का प्रबन्ध यहाँ की अमेरिका सरकार करती है।फिर भी जिन लोगों के पास घर नहीं होतावो सड़क पर सो जाते हैं।सोशल सर्विस करने वाले अपनी तरफ़ से उन लोगों के लिए खाना लेकर जाते हैं ।

यहाँ पर गुजराती लोग बहुत हैं।यहाँ पर उनके तरह-तरह के बिज़नेस हैं।सबसे ज़्यादा खाने की व अन्य चीजों के स्टोर गुजरातियों के हैं।पेट्रोल पंप भी उनके हैं।नवरात्रि पर बहुत ही शानदार गरबा होता है,जो देखने लायक़ होता है और लगता है कि हम इंडिया में हैं।अपनी भारतीय संस्कृति के अनुसार गरबे में सब महिलायें लड़कियाँ तरह-तरह के लहंगा चुनरी साड़ी पहनकर आती हैं।आदमी बच्चे धोती कुर्ता पजामा कुर्ता पहन कर बढ़िया डांस करते हैं ।यहाँ मंदिर में भी गरबा होता है ।

न्यूयार्क और वाशिंगटन में सबसे ज़्यादा भारतीय हैं ।इसी से वहाँ भारतीयों के लिये ‘ ओल्ड- होम ‘ खोले गये हैं ।पैसा ख़ुद का ज़रूर लगता है,पर सब हम उम्र मिलजुल कर रहते हैंऔर अपना अकेलापन आपस में बाँटते हैं ।उनके लिए वहाँ मंदिर भी है,जहाँ वो पूजा कर सकते हैं।वहाँ पर उन्हें उनके अनुसार इंडियन खाना भी दिया जाता है।समय- समय पर उन्हें पिकनिक व अन्य जगहों पर भी घुमाने ले जाते हैं।

बस एक बात ज़रूर है कि यहाँ जिन भारतीयों के बच्चे अमेरिका में पैदा हुये पले- बढ़े हैं वो इंडियन खाने के बजाय अमेरिकन खाना ही ज़्यादा पसंद करते हैं ।यहाँ पर फ़्रोजन खाना ज़्यादा मिलता है ।पति- पत्नी दोनों नौकरी करते हैं ।थक कर आते हैं और कभी खाना न बनाने का मन न हो तो रखा खाना ही काम आता है।इसी वजह से महिलाओं को खाना बनाने में ज़्यादा मेहनत की ज़रूरत नहीं पड़ती ।

लोग पूछते हैं कि अमेरिका में इंडियन चीज़ें मिलती हैं कि नहीं? तो यहाँ पर दुनिया की सभी चीजें मिलती हैं ।लिज्जत पापड़,बड़ी,अचार सिंघाड़े का आटा मसाले सभी कुछ मिलते हैं।सभी तरह के भारतीय कपड़े भी मिलते हैं ।साड़ी और दूसरे कपड़े वाशिंगटन न्यूयार्क में मिलते हैं ।यहाँ पर लोग आन- लाइन आर्डर देकर भी सामान मँगवाते है ।

यहाँ पर सभी भारतीय बहुत मिल जुलकर रहते हैं।और एक दूसरे के सुख दुख में सब साथ खड़े रहते हैं।जब भी किसी के परिवार के लोग यहां घूमने के लिये आते हैं ।तो सब बारी- बारी अपने घर खाने बुलाते हैं ।जिससे आपस में अपनापन बढ़ता है ।

यहाँ की एक बात सबसे ख़राब लगती हैऔर वो ये है कि जब किसी इंडियन की मौत हो जाती है तो उसे चार कंधे भी नसीब नहीं होते।यहाँ के नियम क़ानून बहुत कठोर होते हैं ।यदि कोई व्यक्ति बीमारी से अस्पताल में मरता है तो उसका तुरंत अंतिम संस्कार नहीं किया जाता।ताबूत में रखकर मुर्दा घर में रखा जाता है।एक दिन वो उसे वाच करते हैं ।और फिर यहाँ पर अंतिम संस्कार के लिये लाइन लगी रहती है।काफ़ी पेपर वर्क होता है,तब जाकर नंबर आता है ।

यहाँ पर मृत व्यक्ति को इलेक्ट्रिक मशीन में जलाया जाता है पर अब शायद कुछ दिनों में इंडियन ज़्यादा होने से चिता में जलाये जाने का भी प्रबंध हो जायेगा।कभी-कभी तीन चार दिन भी लग जाते हैं और नंबर आने पर ही अंतिम संस्कार होता है ।जिसके यहाँ मौत हो जाती है,उनके दोस्त लोग बारी- बारी से अपने घर से चाय नाश्ता व खाना भेजते हैं ।बहुत मिल जुल कर रहते हैं।एक दूसरे की बहुत इज़्ज़त करते हैं।

विदेश में भी हमारा भारत 🇮🇳 बसा है ।हर जगह के माइनस और प्लस पाइन्ट होते हैं।फिर भी अमेरिका की चकाचौंध भरी ज़िंदगी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है,और लोग अमेरिका आते हैं और आते रहेंगे ।

आशा मुखरिया,जेक्सनविल, फ्लोरिडा, अमेरिका

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