सिहोर

तेरी आँखों में हम खो गए

– तेरी आँखों में हम खो गए

तेरी आँखों में हम खो गए।
प्यार के सिलसिले हो गए।

झूठ की महफिलें सज गईं।
झूठ सब आज सच हो गए।

याद की बारिशें जो हुईं।
बीज कुछ प्रीत के बो गए।

लाख चाहा बुलाना उन्हें।
लौट पाए नहीं जो गए।

नीर के कुछ सजल फूल पर।
ओस बनकर ठहर तो गए।

हाँ सताकर हमें अब तलक।
चैन की नींद वो सो गए।

इश्क़ प्रतिभा निभाया सदा।
इश्क़ के हर सितम ढो गए।

डॉ प्रतिभा गर्ग , गुरुग्राम, हरियाणा

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