साहित्य का सोपान

ये दिल हमारा….

उलझें रिश्ते अपनी वजह से टूटते है और बहुत शोर भी करते है…. पर….

ये दिल हमारा कितना सहता है और शिकायत भी नहीं करता

यादे बनते है – बिखरते है और एहसासो को दफना कर आगे गुमनाम गलियों में बढ़ चलते है….
ये दिल हमारा कितना सहता है और शिकायत भी नहीं करता

पाना सब कुछ है, खोने से डरता है और बिखरने से रोता है….
ये दिल हमारा कितना सहता है और शिकायत भी नहीं करता

ये दिल हमारा कितना सहता है और शिकायत भी नहीं करता

लड़की_हो_सह_लो

जोर से हँसो मत,
नज़रे मिलाओ मत,
लड़की हो सह लो,
औरत हो एडजस्ट कर लो….

कोई गाली दे पलट कर जवाब मत दो,
कोई चरित्रहीन बोले उन्हें माफ़ कर दो,
लड़की हो सह लो,
औरत हो एडजस्ट कर लो….

गलती ना होने पर भी हर बार हाथ जोड़ लो,
रिश्ता ना टूटे इसलिए होंठ हर बार सील लो,
लड़की हो सह लो,
औरत हो एडजस्ट कर लो….

बात कम करो और अपनी राय मत दिया करो,
तुम खाना बनाओ और कुछ सुन कर भी अपने कान बंद कर लिया करो,
लड़की हो सह लो,
औरत हो एडजस्ट कर लो

लड़की हो सह लो
औरत हो एडजस्ट कर लो

इशानी मुखर्जी, रायपुर, छत्तीसगढ़

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