भोपाल

प्रताड़ना से परेशान होकर युवक ने दी थी जान, पांच पुलिसकर्मी लाइन अटैच

डीआईजी,भोपाल तीन सप्ताह में दें जवाब

भोपाल,18 जून 2021
एमपी मीडिया पॉइंट

भोपाल शहर के निशातपुरा की गोया कालोनी में युवक द्वारा की गई खुदकुशी मामले में पांच पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया है। निशातपुरा सीएसपी के मुताबिक गोया कालोनी निवासी दौलतराम यादव के बेटे अरूण यादव ने तीन दिन पहले घर में फांसी लगा ली थी। मामले में आयोग के माननीय अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार जैन ने उप पुलिस महानिरीक्षक, भोपाल से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। बताया गया है कि रात्रि गश्त के दौरान पुलिसकर्मियों ने तीन युवकों को खड़े देखा था। दो युवक भाग गये पर रोहित वर्मा को पुलिस ने पकड़ लिया। उसके पास बाइक के पेपर नहीं थे। वाहन चोरी के संदेह में रोहित को निशातपुरा थाने लाया गया। पुलिस को वहीं एक और बाइक लावारिस मिली। रोहित ने एक दोस्त का नाम अरूण बताया था। पुलिस रात चार बजे किसी अरूण यादव को उठाकर लाई थी। रोहित ने उसे पहचानने से इंकार कर दिया तो सुबह नौ बजे अरूण को पिता के साथ रवाना कर दिया था। छह घंटे थाने में रहने से परेशान होकर अरूण ने फांसी लगा ली थी।

पुलिस की अनुचित कार्यवाही से पीडित आवेदक को 25 हज़ार रू. दो माह में अदा करें

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग द्वारा पुलिस की अनुचित कार्यवाही से पीडित को पच्चीस हजार रूपये दो माह में अदा करने की अनुशंसा राज्य शासन को की गई है। मामला मन्दसौर जिले का है।

आयोग के प्रकरण क्रमांक 2658/मंदसौर/2020 के अनुसार

आवेदक जगदीश अग्रवाल ने एक शिकायती आवेदन आयोग को प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि वह गरोठ (जिला मंदसौर) में पत्रकार के रूप में कार्य करते हैं। गरोठ के ही एक अन्य व्यक्ति ने उनके विरूद्ध दुर्भावनापूर्वक असत्य शिकायत कर देने पर गरोठ पुलिस द्वारा उनपर अकारण धारा-107/116 दण्ड प्रक्रिया संहिता की कार्यवाही कर उनकी छवि खराब कर उन्हें प्रताडित किया गया। आयोग ने मामले की निरंतर सुनवाई की। आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता श्री अग्रवाल पर पुलिस की अनुचित कार्यवाही के कारण उसके मौलिक/मानव अधिकारों का उल्लंघन हुआ। अतः राज्य शासन उन्हें क्षतिपूर्ति राशि के रूप में पच्चीस हजार रूपये दो माह में अदा करे। शासन चाहे, तो यह राशि संबंधित दोषी पुलिस अधिकारी से वसूल कर सकता है। शासन दोषी पुलिस अधिकारी के विरूद्ध विभागीय जांच उपरांत नियमानुसार कार्यवाही भी करे। अनुशंसा में आयोग ने यह भी कहा है कि शासन अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों द्वारा धारा- 107/116(3) दण्ड प्रक्रिया संहिता की प्रतिबंधात्मक कार्यवाही के दुरूपयोग रोकने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करे और अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में इन प्रावधानों के उपयोग की प्रक्रिया भी स्थापित करे, जिससे ऐसी प्रतिबंधात्मक कार्यवाही के कारण किसी भी व्यक्ति के किसी भी मौलिक/मानव अधिकारों का उल्लंघन न हो पाये।

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