सीहोर

उच्च कोटि की शिक्षा के नाम पर विख्यात वीआईटी विश्वविद्यालय,गरीबो के लिए बना अभिशाप

     दिनेश शर्मा
आष्टा,एमपी मीडिया पॉइंट

सीहोर की कोठरी में स्थित वीआईटी यूनिवर्सिटी प्रबन्धन आज उन गरीब किसानों के लिए अभिशाप बन गयी है।जिन्हें जीवन यापन के लिए सरकार ने अंशदान में जमीन के पट्टे दिए है, ओर प्रबन्धन किसानों के सरकारी रास्ते ओर नाले पर बेखोफ कर रहा है कब्जा। लाचार गरीब जिम्मेदारो से कर रहा न्याय की आस।

आष्टा नजदीक ग्राम कोठरी में सरकार की मेहरबानी पर बनी  वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी को लेकर आष्टा तहसील ही नही अपितु पूरा जिला अपने को धन्य समझ रहा था। की उच्च शिक्षा का एक बड़ा प्लेटफार्म इस प्रदेश को मिल रहा है। जिससे कि शिक्षा के साथ साथ पूरे जिले सहित खासकर ग्राम कोठरी के निवासियों को बहुत लाभ होगा। किन्तु प्रबन्धन की स्वार्थगत नीति ने यूनिवर्सिटी केम्पस के आसपास के गरीब लघु किसानों का तो सुकून से जीना ही मुश्किल कर दिया। शिक्षा के नाम पर बहुत बड़ा भूमि का रकबा सरकार के रहमोकरम से हथिया लेने के बाद भी आज यह विश्वविद्यालय अब तो गांव के उन गरीबो की जमीनों पर भी अपने दाँत गड़ा रहा है।जो इस यूनिवर्सिटी के आस पास अंशदान में मिली जमीनों पर खेती कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे है। एक तरफ प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह अपने आप को किसान बताते है। वही उनके गृहजिले के किसान एक यूनिवर्सिटी से परेशान होकर जनप्रतिनिधियों ओर सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहा है। यहां तक कि किसानों ने शिवराज सिंह तक को भी शिकायत पत्र भेजा है, लेकिन अभी तक मुखिया ने अपने गृहजिले के किसानों की समस्या का समाधान नही किया। आष्टा तहसील की नगर परिषद कोठरी जो कि विधायक जी का ग्रह ग्राम है। यहां पर जबसे वेल्लूर इंस्टिट्यूट यूनिवर्सिटी स्थापित हुई है। तब से ही यूनिवर्सिटी केम्पस के आसपास के किसानों का खेती करना दूभर हो गया है। केम्पस के पास से लगभग 100 से ज्यादा किसानों का खेतो पर जाने का आम रास्ता है। वही आसपास के ओर भी लगे गाँवो के लोग इस रास्ते का उपयोग करते है। लेकिन यूनिवर्सिटी प्रबन्धन ने इस आम सरकारी रास्ते और सरकारी नाले पर पूरी तरह से अतिक्रमण करना शुरू कर दिया है। ओर रास्ते के बन्द कर दिया है। ओर अपने रसूक के बल पर जिम्मेदारो को बगलगीर समझ हठ धर्मिता अपनाते हुए। खुली दादागिरी भी कर रहा है। ऐसा पीडत गरीब किसानों का कहना है। जब इस गम्भीर मामले को लेकर यूनिवर्सिटी के जिम्मेदार अधिकारियों और प्रबन्धन के संचालको से प्रेस ने सम्पर्क कर प्रबन्धन का पक्ष समझना चाहा तो प्रबन्धन ने बात करना तो दूर अधिकारी ने फोन तक अटेंड नही किया। इससे भी ऐसा प्रतीत होता है कि शिक्षा के नाम पर बनी यह वी आई टी यूनिवर्सिटी शिक्षा के साथ साथ एक बड़ी भूमाफिया के रूप में भी दिखाई दे रही है। जो बेस कीमती जमीनों को डराधमका कर या परेशान कर कौड़ियों के भाव मे खरीदना चाहता है। आपको बता दे जिस तरह के हालात आज यहां दिखाई दे रहे है उससे ऐसा लगता है इस यूनिवर्सिटी की जमीन घेराबंदी से त्रस्त होकर सीमा बन्दी में फस चुके कुछ गरीब या तो अपनी जमीन को प्रबन्धन को औनेपौने दाम में बेच चुके है या बेचने पर मजबूर हो जायेए। इससे इंकार नही किया जा सकता। जिस तरह से सरकारी नाला ओर गाँव के गोये वाली सरकारी जमीन के साथ साथ आम रास्ते पर प्रबन्धन बेखोफ होकर कब्जा कर अपना निर्माण कर रहा है जिसे किसानों से समझ कर जब प्रेस ने स्थानीय विधायक से हकीकत समझना चाही तो उनका साफ कहना था कि वहां किसानों का आम रास्ता है जिसे कोई बन्द नही कर सकता।और उन्होंने तुरंत वेल्लूर इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी के अधिकारी से बात की ओर अल्टीमेटम देते हुए कार्य को बंद करने को कहा गया साथ ही मीडिया को बताया कि वह किसानों का रास्ता है। और यूनिवर्सिटी वालो को कब्जा नही करने देंगे और किसानों का रास्ता पूर्व की तरह ही खुला रहेगा। जब इस मामले में तहसील रघुवीर मरावी से बात की तो उनका कहना है कि वह केवल डालने का कार्य चल रहा है में स्वयं वहां गया था और किसानों के रास्ते पर अतिक्रमण नही है। किसानों का रास्ता खुला रहेगा। और अगर केम्पस में कोई सरकारी जमीन है तो उसकी जांच कर जमीन मुक्त कराई जाएगी और तार फेंसिंग कराई जाएगी।हैरत की बात यह है कि जिस ग्राम कोठरी में यह यूनिवर्सिटी स्थापित है।यह विधायक का ग्रह ग्राम है। ऐसे में ग्रामीणो को विश्चास है।कि विधायक हमारे साथ अन्याय नही होने देंगे। नगर परिषद कोठरी के अध्यक्ष रूपेश पटेल का भी यही कहना है।कि वीआईटी जिस पठार पर स्थापित है।वहा आसपास सेकड़ो गरीब किसानों की जमीन है। जो कि उन्हें सरकार से अंशदान में मिली है। जिस पर की यह गरीब वर्षो से खेती कर अपना पेट भर रहे है। ओर जिस जगह ओर ओर नाले पर प्रबन्धन अतिक्रमण कर अपना बता रहा है।वह पूरी तरह से सरकारी है। जिसे प्रशासन को मुक्त करना चाहिए।अगर प्रशासन जल्दी ही इस समस्या का हल नही करेगा तो बमज़बूरी गरीब किसानों के साथ पूरे ग्राम कोठरी को सड़क पर आना पड़ेगा।

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