लेख

पर्यावरण आतंकवाद से निपटना होगा

 

हमारी-आपकी सांसें इस हरियाली से ही ऊर्जा वान हैं पर आज हमने किसी को भी नहीं बख्शा है। इसी को पर्यावरण का आतंकवाद भी कहेंगे जहां हमने अपनी धरती मां का जिस तरह से दोहन किया है वह शोचनीय है आज न वायु शुद्ध है न जल शुद्ध है हम किस परिस्थिति में जीने को बेबस हैं यह सोचना हमसभी का दायित्व है हम आज नहीं चेते तो आने वाले समय में आने वाली पीढ़ी को कैसा पर्यावरण देकर जाएंगे कभी हम लोग अपने अतीत के पन्ने पलटेंगे तो पाएंगे कि कभी कैंसर जैसी बीमारी का नाम हम लोगों ने यदा-कदा ही सुना होगा पर आज हम परिवारों में समाज में इस की गम्भीरता को महसूस कर रहे हैं । आज कोरोनावायरस ने जिस तरह विस्तृत रूप से अपने पैर फैलाए हैं वह भी इसी सोच की देन है जहां शुद्ध आक्सीजन के लिए फेफड़े व्याकुल हो रहे थे और हमसभी लाचार और बेबस नजर आ रहे थे अब तो विश्व को जागरूक होना ही होगा एक दिवस के रूप में प्रस्तुत कर हम सभी अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो सकते हैं हमारी सरकार को कानून बनाना चाहिए कि जब भी आपके यहां परिवार में बेटा-बेटी का जन्म हो माता-पिता एक पौधा लगाएं और लगाएं ही नहीं उसकी देखभाल भी वैसे ही करें जैसे आप अपने बच्चे की परवरिश करते हैं देखिएगा आप का परिवार भी चहकेगा और उस पौधे से आपका घर महकेगा । ऐसे ही कुछ और कारगर, व्यवहारिक उपायों को कठोरता के साथ उठाने से पर्यावरण आतंकवाद से निपटा जा सकेगा। अन्यथा एक दिन पर्यावरण की चिंता गोष्ठी या मंच से कर देने भर से न तो सांस की वायु शुद्ध हो सकती है न प्यास का पानी…. । विचार हमें करना है आने वाली पीढी को क्या सौंपकर जाने की तैयारी हम कर रहे हैं।

रश्मि निवास, बरेली, उत्तरप्रदेश

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